किसके माथे सजेगा बंगाल का ताज ?--धर्मेंद्र कुमार
लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा और सत्ता की जंग पश्चिम बंगाल में बुधवार 29 अप्रेल को 2026 के विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हो गया। दूसरे चरण में भी लगभग 93 प्रतिशत मतदान हुआ। यह जहां लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत हैं। वहीं लगभग 27 लाख मतदाता जो वोट देने से वंचित रह गए, यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय के तौर पर याद रखा जाएगा। यह कहीं ना कहीं भारतीय संविधान प्रदत्त भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन का मामला है। बड़ा सवाल यह है कि न्यायालय ने भी इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया, सिवाय एक दो टिप्पणी करने के। यह लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत भी हैं। बंगाल का चुनाव सिर्फ 294 सीटों की जंग नहीं है। ये लड़ाई बंगाल की अस्मिता, सियासी दिशा, संघीय ढांचे और जनता के मूड की असली परीक्षा है। मुख्य रुप से बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है। लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन और ISF जैसे दल भी समीकरण बदल सकते हैं। कौन से मुद्दे रहे हावी ? बंगाल के पूरे चुनाव में कोई एक मुद्दा ऐसा नहीं रहा जिससे किसी एक पक्ष में लहर चली हो। भाजपा ने प्रारंभ से घुसपैठिए, ह...