Tuesday, October 7, 2025

पूर्वी सिंहभूम कांग्रेस में बगावत के सुर: कार्यकर्ता बोले, नहीं चलेगा मनमाना फैसला



सिख समुदाय की वापसी की उम्मीद: कांग्रेस ने परविंदर सिंह पर जताया भरोसा

जमशेदपुर। (धर्मेंद्र कुमार) कांग्रेस पार्टी आलाकमान की ओर 4 अक्टूबर को झारखंड प्रदेश के नव नियुक्त जिला अध्यक्षों की सूची जारी की गई. सूची जारी होने के साथ ही प्रदेश स्तर पर नव नियुक्त अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है. यह विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है. पूर्वी सिंहभून,देवघर,हजारीबाग सहित कई अन्य जिलों में कार्यकर्ताओं ने विरोध के स्वर को बुलंद किया है. सोशल मीडिया पर बयान जारी किए जा रहे हैं. वहीं पार्टी आलाकमान को पत्र एवं ईमेल के माध्यम से जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में कथित तौर पर हुई गड़बड़ी से संबंधित जानकारी दी गई है. वहीं पर्वेक्षक द्वार भेजी गई सूची को सार्वजनिक करने की मांग की गई है. हालांकि अभी तक पार्टी इस संबंध बहुत गंभीर नहीं दिख रही है.

मनोनित ही करना तो रायशुमारी का नाटक क्यों
कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय एक वरिष्ठ नेता ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि जिला अध्यक्षों कि नियुक्ति को लेकर पार्टी द्वारा जो प्रक्रिया अपनाई गई थी, कार्यकर्ताओं ने उसका स्वागत किया था. कार्यकर्ताओं को विश्वास था कि इस बार चुनाव निष्पक्ष होगा. लेकिन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति से जाहिर होता है कि रायशुमारी केवल आईवॉश था पार्टी में पैरवी और किसी बड़े नेता के सिफारिश ही ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि पूर्वी सिंहभूम सहित अन्य जिलों में भी इस बार यही देखने को मिला. उनका कहना था कि जब मनोनित ही करना तो रायशुमारी का नाटक करने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी. अब तक तो यही होता आया है. पार्टी को कोई बड़ा नेता अपने चहेते को ही पार्टी का अध्यक्ष बनाता रहा है. इस बार भी वहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी फेयर इलेक्शन की बात करते है, वहीं उनकी पार्टी में ही उनके विचार के ठीक उल्ट काम किया जाता है. ऐसे में पार्टी कैसे और कितना मजबूत हो पाएगा यह अपने आप में बड़ा सवाल है. 


पांच दशक में पहली बार सिख बना जिला अध्यक्ष

पूर्वी सिंहभूम कांग्रेस के इतिहास में पहली बार कोई सिख समुदाय से जिला अध्यक्ष( परविंदर सिंह) बना है. अभी तक जिला अध्यक्ष पद पर स्वर्ण जाति का ही वर्चस्व रहा है. पहली बार पार्टी ने हिम्मत दिखाते हुए सिख समुदाय से परविंदर सिंह को जिला अध्यक्ष बनाया है. जहां परिवंदर सिंह के कंधों पर पार्टी व संगठन को पंचायत स्तर पर मजबूती प्रदान करने की एक बड़ी जिम्मेवारी है वहीं उनके समक्ष विरोधियों को साथ लेकर चलने की चुनौती भी है. 1984 के बाद से सिख समुदाय ने कांग्रेस पार्टी से दूरी बना ली थी. जबकि 1984 से पहले सिख सुदाय को कांग्रेस के एक मजबूत वोट बैंक के तौर पर देखा जाता था. पिछले दिनों मोदी सरकार द्वारा किसान आंदोलन को जिस प्रकार से कुचने का प्रयास किया गया. इससे सिख समुदाय बीजेपी से नाराज चल रहे है. परविंदर सिंह के पास एक मौका है कि एक बार वो फिर से सिख समुदाय को कांग्रेस पार्टी से जोड़े इसमें वो कितना सफल हो पाते है यह देखना होगा. हालांकि विगत झारखंड विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पूर्वी से कांग्रेस के प्रत्याशी डा. अजय कुमार के पक्ष में सिख समुदाय ने वोट कर अपना समर्थन दिया था.

कार्यकर्ता कर रहें है विरोध

 परविंदर सिंह को पूर्वी सिंहभूम कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध जारी है. उनका कहना है कि यदि उनकी बातें नहीं सुनी गई तो वे आंदोलन व पूतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे. कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष औऱ प्रदेश प्रभारी द्वारा उनका फोन रिसिव नहीं किया जा रहा है. पार्टी के वरीय नेताओं पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी की बात कही जा रही है. कार्यकर्ताओं की मांग है कि पर्वेक्षक द्वारा जो सूची पार्टी आलाकमान को भेजी गई है उसको सार्वजनिक की जाए ताकि इस बात का खुलासा हो सके कि किस आधार पर जिला अध्यक्ष की नियुक्ति की गई है. अब देखना होगा कि पार्टी में मचा बवाल पर आलाकमान क्या निर्णय लेते है ? कहीं घमासान पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित ना हो जाए. घाटशिला में उप चुनाव होना है ऐसे में पार्टी की इस अंदरुनी खिंचतान का कितना असर चुनाव पर पड़ेगा यह भी देखना दिलचस्प होगा.

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