तीसरे विकल्प का आगाज है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ है ? धर्मेंद्र कुमार
भारतीय लोकतंत्र के तथाकथित अमृतकाल में देश का युवा अपने भविष्य व अधिकार को लेकर सड़क पर आंदोलनरत है। सरकार की लगातार बेरुखी एवं सड़े हुए सिस्टम का दंश झेल रहे युवाओं के सब्र का बांध तब टूट गया, जब देश की न्याय व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे माननीय ने अपने अधिकार के लिए आबाज बुलंद कर रहे युवाओं को कॉकरोच जैसे शब्दों से नवाजा। देश की युवा पीढ़ी ने इस गाली को चुनौती के तौर पर स्वीकार करते हुए कहा कि हां, हम उसी सड़े गले सिस्टम और सरकार की गलत नीतियों की उपज हैं। देश के युवाओं का मनोबल आज जिस गहराई तक टूट चुका है, वह केवल सरकार की नीतियों की विफलता नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जड़ता और संवेदनहीनता का परिणाम है। लगातार अत्याचार, बेरोजगारी, शिक्षा में गिरावट और अवसरों की कमी ने युवाओं को हताश व निराश कर दिया है। इतिहास हवाह है कि जब भी देश की युवा पीढ़ी नें अंगड़ाई ली, सत्ता परिवर्तन हो गया। चाहे स्वतंत्रता का आंदोलन हो या जेपी का आंदोलन। राजनीतिक दलों से मोहभंग राजनीतिक दलों द्वारा सत्ता में आने से पहले युवाओं से रोजगार, शिक्षा और अवसरों के वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता हासिल करन...