Tuesday, October 28, 2025

चुनावी मौसम में नेता जी का राजनीतिक योगाभ्यास व प्राणायाम धर्मेंद्र कुमार


बिहार में चुनावी मौसम आते ही नेता जी का शरीर लचीला हो जाता है. नहीं, योगाभ्यास से नहीं बल्कि वोट पाने की साधना से. हर पांच साल में एक बार नेता जी पूरे जतन से ‘वोट-योग’ की तपस्या करते हैं, जिसमें वे जनता को लुभाने के लिए ऐसे-ऐसे आसन करते हैं कि बड़े बड़े योग गुरु भी अचंभित जाएं. इसमें तो कई नेताओं को महारत हासिल है. चुनाव के दौरान नेता जी द्वारा राजनीतिक योगासन के विभिन्न आसन के माध्यम से जनता को उनकी बेहतर राजनीतिक स्वास्थ्य का जानकारी प्रदान करते हैं. इन राजनीति आसन से किसे कितना फायदा पहुंचा है यह विमर्श का विषय हो सकता है लेकिन नेता जी हर पांच वर्षों पर यह करते जरुर हैं.
 वादाासन
सबसे पहले नेता जी के वादासन की बात करें तो इस आसन में जनता के सामने वादों की माला जपते हैं कि जीतने के साथ ही “हर खेत तक पानी पहुंचेगा,” “हर हाथ को काम मिलेगा,” “हर सड़क पर विकास दौड़ेगा.” इस आसन में नेता जी की गर्दन ऊपर, आंखें चमकदार, और ज़ुबान इतनी लचीली कि कल के वादे आज के बयान से मेल न खाएं तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता.
 पलटासन
पलटासन नेता जी का पसंदीदा आसन है. इसमें वे अपने कपड़ों की तरह पुराने बयानों को पलटते हैं, गठबंधन बदलते हैं, और विचारधारा को योगा मैट की तरह मोड़ते हैं. कल जो विरोधी था, आज वही सहयोगी है. कल जो “जनविरोधी” था, आज “जनसेवक” बन गया है. जनता पूछे तो जवाब मिलता है—“राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता, बस स्थायी कुर्सी होती है.” बिहार की जनता ने कई बार इस पलटासन को देखा समझा और जाना है.
  राजनीतिक प्राणायाम
इसमें नेता जी सांसों के साथ भावनाएं फूंकते हैं—कभी जाति, कभी धर्म, कभी क्षेत्रीय गौरव. “हम आपके हैं, आप हमारे हैं.”बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाएंगे लेकिन समय नहीं बताएंगे, “हमने किया है, हम ही करेंगे.” इस प्राणायाम में जनता की सांसे भले थम जाए, लेकिन नेता जी नजरे उनकी वोट पर टिकी होती है.
नेता जी के राजनीतिक योगाभ्यास व प्राणायाम के दौरान जनता को चाहिए कि वह अपना ‘बुद्धि-योग’ साधे. ना सिर्फ वादा सुनें, अपितु उसे याद भी रखें और नेता जी को गाहे बगाहे उनके वादों की याद भी दिलाती रहें ताकि नेता जी को भी सनद रहे कि जनता भी उनके राजनीतिक योग को बेहतर समझती है. "नेता जी का योग तभी सफल माना जाएगा, जब जनता का लोकतंत्र स्वस्थ और सजग हो. लोकतंत्र में सबसे बड़ा योग वही है, जो जनता को जागरूक बनाता है, और नेता को जवाबदेह.

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