हेमंत ने दिखाई हिम्मत, विपक्ष की बोलती बंद: छात्रों में खुशी की लहर-- धर्मेंद्र कुमार

हेमंत ने दिखाई हिम्मत, विपक्ष की बोलती बंद: छात्रों में खुशी की लहर
-- धर्मेंद्र कुमार 


झारखंड की राजनीति और छात्र आंदोलन के इतिहास में 17 अगस्त 2026 का दिन एक बड़े नीतिगत बदलाव और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के रूप में दर्ज हो गया है। JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं तथा नियुक्तियों में कथित गड़बड़ियों और शुचिता की मांग को लेकर पिछले 24-25 दिनों से राजधानी रांची की सड़कों और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे युवाओं के संघर्ष की आखिरकार जीत हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी कैबिनेट की एक आपातकालीन बैठक बुलाई और आंदोलनकारी छात्रों की सबसे बड़ी और प्रमुख मांग को सहर्ष स्वीकार करते हुए JSSC- CGL परीक्षा और विवादित आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं व चयन प्रक्रियाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की ऐतिहासिक घोषणा कर दी। मुख्यमंत्री के इस साहसिक और संवेदनशील फैसले ने जहां राज्य के लाखों अभ्यर्थियों में उम्मीद और खुशी की एक अभूतपूर्व लहर दौड़ गई, वहीं छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर चुनावी रोटियां सेंकने की फिराक में बैठे विपक्ष की बोलती पूरी तरह बंद कर दी है।

छात्र शक्ति का सम्मान और हेमंत का साहसिक कदम

एक संवेदनशील लोकतांत्रिक व्यवस्था वही है जो जनभावनाओं, विशेषकर देश के कर्णधार कहे जाने वाले युवाओं की आवाज को अनसुना न करे। पिछले तीन हफ्तों से अधिक समय से राज्य के होनहार अभ्यर्थी भूख हड़ताल, धरने और लाठीचार्ज के साए में अपनी परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिए लड़ रहे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे महज एक प्रशासनिक या कानून-व्यवस्था की समस्या के तौर पर देखने के बजाय अत्यंत संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया।
कैबिनेट के फैसले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि परीक्षा के स्थापित नियमों के उल्लंघन के कारण गड़बड़ियां हुईं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने न केवल सीजीएल परीक्षा रद्द की, बल्कि विवादित एजेंसी TDPL के माध्यम से हुई सभी भर्तियों को निरस्त कर दिया। इससे भी बड़ा कदम उठाते हुए हेमंत सरकार ने साल 2014 से लेकर अब तक हुई सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक सीआईडी जांच और एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच कमेटी के गठन का आदेश दिया है। यह फैसला दर्शाता है कि मुख्यमंत्री में कमियों को स्वीकार करने और उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकने की प्रशासनिक हिम्मत है।

विपक्ष के एजेंडे पर लगा पूर्णविराम

झारखंड में विपक्ष इस छात्र आंदोलन को सरकार के खिलाफ एक अचूक सियासी हथियार मानकर चल रहा था। भाजपा और अन्य विरोधी दल लगातार इस मुद्दे को हवा दे रहे थे, ताकि युवाओं के गुस्से को पूरी तरह सत्ता विरोधी लहर में बदला जा सके। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान हुई हिंसक घटनाओं और पथराव के पीछे भी राजनीतिक उकसावे की बात सामने आई थी। विपक्ष की रणनीति थी कि सरकार और छात्रों के बीच का यह गतिरोध इसी तरह लंबा खींचता रहे।
लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक ही झटके में छात्रों की सभी जायज मांगों को मानकर विपक्ष के पूरे राजनीतिक एजेंडे को ध्वस्त कर दिया है। अब विपक्ष के पास सरकार को घेरने का कोई नैतिक और तार्किक आधार नहीं बचा है। जो विपक्ष कल तक सरकार पर युवाओं की अनदेखी का आरोप लगा रहा था, वह आज इस मास्टरस्ट्रोक के बाद पूरी तरह रक्षात्मक मुद्रा में आ गया है और उसके पास बयानों की कंगाली साफ दिखाई दे रही है।

जश्न का माहौल और संवाद की जीत

फैसले की खबर मिलते ही रांची के धरना स्थलों पर एक भावुक और उत्सव जैसा माहौल देखा गया। हफ्तों से अनशन पर बैठे छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, गले लगाया और 'हेमंत सोरेन जिंदाबाद' के नारे लगाए। छात्रों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई की खुले दिल से सराहना करते हुए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया है। छात्रों का यह भरोसा जीतना हेमंत सरकार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
लोकतंत्र में संवाद हमेशा से ही दमन पर भारी पड़ता है। हेमंत सरकार ने यह साबित किया कि वह युवाओं की अपनी सरकार है। अब सरकार की अगली बड़ी चुनौती वरिष्ठ आईएएस अमिताभ कौशल के नेतृत्व में बनी रिफॉर्म कमेटी के माध्यम से एक ऐसा फूलप्रूफ और पारदर्शी सिस्टम तैयार करने की है, जिससे भविष्य में कभी कोई 'सॉल्वर गैंग' या भ्रष्ट तंत्र युवाओं के सपनों पर डाका न डाल सके। मुख्यमंत्री का यह कदम झारखंड की भावी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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