पेपर लीक धंधा चालू आहे ! धर्मेंद्र कुमार
संदर्भः UGC-NET पेपर लीक
पेपर लीक धंधा चालू आहे !
धर्मेंद्र कुमार
'सिर मुड़ाते ही ओले पड़ना'—यह मुहावरा इन दिनों नवनिर्वाचित शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के लिए बिल्कुल सटीक बैठ रहा है। अभी जोशी ने शिक्षा विभाग की कमान संभाली ही थी और वे इस महकमे की जटिलताओं को समझ भी नहीं पाए थे कि देश के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े परीक्षाओं में से एक, यूजीसी-नेट (UGC-NET) का पेपर लीक होने की खबर ने शिक्षा व्यवस्था की चूलें हिलाकर रख दीं। यह महज एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों के सपनों, भविष्य और अभिभावकों की गाढ़ी कमाई के साथ क्रूर मजाक है। यह घटना दर्शाती है कि शिक्षा व्यवस्था के भीतर सड़ांध कितनी गहरी है।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, लेकिन असली सवाल प्रह्लाद जोशी के सामने है कि क्या वे इस 'दीमक' को खत्म कर पाएंगे? नेट पेपर लीक ने शिक्षा मंत्रालय के सामने एक बार फिर परीक्षा में पारदर्शिता और सुरक्षा जैसी चुनौती खड़ी कर दी है।
सिस्टम के भीतर 'दिमागी नक्सलियों की गहरी पैठ
जब हम कहते हैं कि सिस्टम के अंदर 'दिमागी नक्सलियों' की घुसपैठ है, तो इसका आशय केवल बाहर के अपराधियों से नहीं है। यह गठजोड़ इससे कहीं ज्यादा खतरनाक है। यह एक ऐसा संगठित गिरोह है जो शिक्षा विभाग, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और प्रिंटिंग प्रेस से लेकर साइबर सेल तक अपनी पैठ बनाए हुए है। इन्हें 'दिमागी नक्सली' इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ये देश की युवा पीढ़ी की मेधा पर हमला कर रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे नक्सली राष्ट्र की नींव पर हमला करते हैं।
ये वो अदृश्य तत्व हैं जो व्यवस्था का हिस्सा बनकर ही व्यवस्था को खोखला कर रहे हैं। जब तक पेपर का सेट तैयार होने से लेकर उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में शामिल इंसानी कड़ियां भ्रष्ट रहेंगी, तब तक कोई भी तकनीक, चाहे वह कितनी भी सुरक्षित क्यों न हो, पेपर लीक को नहीं रोक सकती। ये लोग इतने शातिर हैं कि वे हर सुरक्षा घेरे को भेदने का रास्ता खोज ही लेते हैं।
जोशी के सामने अग्निपरीक्षा
प्रह्लाद जोशी को अब एक नई शुरुआत करनी होगी। सबसे पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की विश्वसनीयता पर उठे सवालों का जवाब देना होगा। क्या एनटीए परीक्षाएं आयोजित करने के लिए सक्षम है? या फिर इस पूरी प्रक्रिया को पुनर्गठित करने की आवश्यकता है? यह एक ऐसा अवसर है जहां जोशी को एक कड़े प्रशासक के रूप में अपनी छवि बनानी होगी। उन्हें न केवल दोषी को सजा दिलानी होगी, बल्कि उन लोगों की भी पहचान करनी होगी जो सिस्टम के अंदर बैठकर इसे खोखला कर रहे हैं। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ एक ईमानदार जांच टीम की आवश्यकता है, जो किसी भी बड़े नाम के आगे न झुके।
शिक्षा नीति और पेपर लीक का अंतर्विरोध
एक तरफ सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए शिक्षा में गुणात्मक सुधार की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पेपर लीक की घटनाएं यह साबित करती हैं कि हम बुनियादी स्तर पर ही विफल हो रहे हैं। जब छात्र अपनी मेहनत पर भरोसा करने के बजाय, या तो पेपर लीक होने का इंतजार करते हैं या फिर इसके कारण हताश होते हैं, तो यह राष्ट्र की बौद्धिक संपदा का विनाश है।
शिक्षा मंत्री के लिए यह स्वागत सुखद नहीं है, लेकिन यह एक मौका भी है। यदि वे इस 'पेपर लीक माफिया' के गठजोड़ को तोड़ पाते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था में एक युगांतरकारी सुधार होगा। वरना, हर बार की तरह केवल जांच समितियां बनेंगी, छात्र सड़कों पर उतरेंगे, और सिस्टम में बैठे 'दिमागी नक्सली' अगली परीक्षा के लिए फिर से तैयार हो जाएंगे। देश के छात्रों को केवल शिक्षा मंत्री के पदभार संभालने की नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में ईमानदारी और सुरक्षा की गारंटी की जरूरत है। यह समय नीतिगत फैसलों से ज्यादा, प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखाने का है।
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