कांग्रेस मुक्त भारत बनाम कांग्रेस युक्त भाजपा धर्मेंद्र कुमार
कांग्रेस मुक्त भारत बनाम कांग्रेस युक्त भाजपा
धर्मेंद्र कुमार
राजनीति की दुनिया में नारों का अपना एक अलग विज्ञान होता है। कुछ नारे चुनाव जिताते हैं, कुछ नारे इतिहास बनाते हैं, और कुछ नारे इतने 'सदाबहार' होते हैं कि समय के साथ खुद ही अपना मज़ाक उड़ाने लगते हैं। साल 2014 के आसपास एक कालजयी नारा गढ़ा गया था—"कांग्रेस मुक्त भारत"। जनता ने इस पर खूब तालियां बजाईं। लेकिन दशक बीतते-बीतते क्रोनोलॉजी ऐसी बदली कि आज आम नागरिक खुद को ठगा महसूस कर रहा है। वह भाजपा की कार्यकारिणी की लिस्ट देख कर असमंजस में है कि क्या यह वही बीजेपी है या भाजपा का कांग्रेसीकरण हो गया है।
भारतीय राजनीति के सबसे बड़े वैज्ञानिक आविष्कार को दुनिया 'बीजेपी वाशिंग मशीन' के नाम से जानती है। इस मशीन को चलाने का ईधन हैं ईडी, सीबीआई और आईटी। प्रक्रिया बड़ी जादुई है। कल तक जो कांग्रेसी नेता भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा था, जिसके 70,000 करोड़ के घोटालों पर खुद प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में दहाड़ते हैं, उसके खिलाफ जांच एजेंसियां अचानक एक्टिव हो जाती हैं। आधी रात को छापेमारी का डर और जेल की हवा खाने का खौफ दिखाया जाता है। बेचारा नेता घबराकर सुबह उठता है और सीधे भाजपा मुख्यालय जाकर 'कमल' का पट्टा गले में डाल लेता है।
जैसे ही वह बीजेपी की दफ्तर की सीढ़ियां चढ़ता है, वाशिंग मशीन का 'स्पिन ड्रायर' इतनी तेजी से घूमता है कि कल का 'महाभ्रष्ट कांग्रेसी' शाम तक "परम संस्कारी और राष्ट्रवादी" नेता बनकर बाहर निकलता है। उसके सारे मुकदमे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। अब उसे जेल की नहीं, बल्कि वीआईपी सुरक्षा प्रदान की जाती है।
कमाल देखिए कि एक तरफ राहुल गांधी देश भर में 'नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान' खोलने का दावा करते घूम रहे हैं, और दूसरी तरफ उनकी अपनी पार्टी के सबसे नामी गिरामी नेता एक-एक करके भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ऐसा लगता है मानो कांग्रेस अब कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि भाजपा के लिए नेता,सांसद और विधायक उपलब्ध कराने वाली एक 'ह्यूमन रिसोर्स' कंसल्टेंसी बन चुकी है।
इस दल बदल राजनीति के जीते-जागते उदाहरण महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्य हैं। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया रातों-रात 'महाराज' से 'राष्ट्रवादी' हो गए। महाराष्ट्र में तो पूरी की पूरी 'नेचुरल करप्ट पार्टी' और कांग्रेस के दिग्गज नेता वाशिंग मशीन में धुलकर सरकार का हिस्सा बन गए। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी तो इस वाशिंग पाउडर के सबसे चमकते हुए ब्रांड एंबेसडर हैं।
इस खेल में सबसे बड़ा झटका भाजपा के उन 'ओरिजिनल' कार्यकर्ताओं को लगा है, जिन्होंने अपनी पूरी जवानी 'कांग्रेस मुक्त' का नारा लगाने, दरी बिछाने और लाठियां खाने में गुजार दी। आज वे कोने में बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए देखते हैं कि जिस कांग्रेसी नेता के पुतले पर वे कल तक कालिख पोता करते थे, आज वही नेताजी मुख्य कुर्सी पर बैठकर उन्हें 'पार्टी की विचारधारा' समझा रहे हैं।
सवाल यह है कि क्या देश सचमुच 'कांग्रेस मुक्त' हो रहा है ! क्योंकि सारे बड़े कांग्रेसी तो अब भाजपा के भीतर मलाई काट रहे हैं। लोकतंत्र का नया सिद्धांत साफ है। विचारधाराएं केवल भाषणों में अच्छी लगती हैं, असली खेल तो सत्ता की चाशनी का है। सफेदी ऐसी कि रंग-बिरंगे कांग्रेसी भी एकदम संस्कारी भगवा में रंगे हुए नजर आ रहे हैं!
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