हेमंत जी हिम्मत दिखाइए, छात्रों से करिए संवाद धर्मेंद्र कुमार

हेमंत जी हिम्मत दिखाइए, छात्रों से करिए संवाद
 धर्मेंद्र कुमार

झारखंड का युवा आज एक बार फिर अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर है। रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पिछले एक सप्ताह से केवल एक धरना स्थल नहीं, बल्कि राज्य के हजारों युवाओं की हताशा, आक्रोश और उम्मीदों का केंद्र बन चुका है। जेपीएससी (14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा) और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में लगे कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों ने राज्य की पूरी चयन प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह आश्वासन कि 'सरकार गंभीर है। इसकी बानगी दिख भी रही है। इस मामले में अभी तक लगभग दो दर्जन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आयोग को अध्यक्ष एल खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया उनसे भी चार बार पूछताछ हो चुकी है। लेकिन परीक्षा को कैंसिल करना और अधिकारियों को सजा दिलाने से केवल बात नहीं बनेगी। मुख्यमंत्री को आगे बढ़कर खुद कमान संभालनी होगी। युवाओं को यह भरोसा दिलाना होगा कि भविष्य में कोई पेपर लीक नहीं होगा। क्योंकि लोकतंत्र में संवाद ही हर गतिरोध का एकमात्र हल है।


 युवा करेंगे विधानसभा का घेराव

कड़कड़ाती धूप और बारिश के बीच, तिरपाल के सहारे खुले आसमान के नीचे रातें काट रहे ये छात्र किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं। ये वे प्रतियोगी छात्र हैं जिन्हें इस वक्त पुस्तकालयों में होना चाहिए था, लेकिन वे अपनी भविष्य की सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। छात्रों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा का ऐतिहासिक घेराव करेंगे। यह अल्टीमेटम कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकार के लिए एक गंभीर राजनीतिक संकट भी है।

 विपक्ष की भूमिका और राजनीतिक चौसर
छात्रों के इस आक्रोश ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह गर्मा दिया है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा सहित आजसू और अन्य राजनीतिक संगठनों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। विपक्ष इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता और युवाओं के साथ विश्वासघात बता रहा है। लेकिन वहीं उनसे नीट पेपर लीक मामले पर सवाल पूछे जाने पर बगले झाकने लग रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राज्य में जेएमएम औऱ बीजेपी के बीच फ्रेंडली मैच चल रहा है। प्रदेश के मुखिया हेमंत सोरेन है और बीजेपी वाले राहुल गांधी का पुतला फूंक रहे हैं। वहीं मानसून सत्र में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामे के आसार हैं। हालांकि, सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह इस आंदोलन को महज 'विपक्ष द्वारा प्रायोजित' बताकर खारिज नहीं कर सकती, क्योंकि सड़कों पर उतरा छात्र वर्ग सीधे तौर पर राज्य का मतदाता है।

 परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत

 कांग्रेस के वरीष्ठ नेता डॉ. अजय कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने कि मांग की है। उनका मानना है कि केवल परीक्षा को रद्द करना काफी नहीं है, बल्कि परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। इस गतिरोध को तोड़ने और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए विशेषज्ञों के अनुसार इसमें कई सुधार करने होंगे। मसलन ओएमआर शीट में हेराफेरी रोकने के लिए पांचवां विकल्प अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। पेपर लीक मामलों की जांच के लिए समय-सीमा तय हो और दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष अदालतों का गठन हो। जेपीएससी और जेएसएससी के शीर्ष पदों पर गैर-राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से स्वच्छ छवि वाले विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए। राज्य सरकार द्वारा पारित प्रतियोगी परीक्षा विरोधी कानून के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई को धरातल पर उतारा जाए।
एक संवेदनशील मुख्यमंत्री और जननेता के रूप में हेमंत सोरेन को इस समय प्रशासनिक फाइलों से बाहर निकलना होगा। युवाओं का आरोप है कि इतने दिनों से चल रहे आंदोलन के बावजूद सरकार का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि सीधे उनसे बात करने स्टेडियम नहीं पहुंचा। मुख्यमंत्री को खुद आगे आकर छात्र प्रतिनिधियों को वार्ता की मेज पर बुलाना चाहिए। झारखंड के युवाओं को इस समय सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की 'हिम्मत' और निर्णायक नेतृत्व की जरूरत है। यदि मुख्यमंत्री इस गतिरोध को समय रहते सीधे संवाद से नहीं सुलझाते हैं, तो मानसून सत्र की शुरुआत राज्य में एक नए राजनीतिक और सामाजिक असंतोष की इबारत लिख सकती है।

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