कॉकरोचों ने कर दी कुर्सी लीक ! धर्मेंद्र कुमार
कॉकरोचों ने कर दी कुर्सी लीक !
धर्मेंद्र कुमार
"आज खुश तो बहुत होगे तुम... जिसकी पुलिसिया रौब और लाठियों के कारण लाखों छात्र अपनी गुहार लेकर अपने ही भविष्य से नहीं मिल पा रहे थे, आज उसी तंत्र की नाक के नीचे जंतर-मंतर की 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने उसे इस्तीफे का पर्चा थमा दिया! जिस भगवान के दरवाजे पर कल तक छात्र न्याय की भीख मांग रहे थे, आज वहां अहंकार खुद घुटने टेक कर खड़ा है।" कल तक जो मंत्री जी कैमरे के सामने 'इस्तीफा' शब्द सुनकर ऐसे चौंकते थे मानो किसी ने उनके कान के पास पटाखा फोड़ दिया हो, आज उनके चेहरे पर बारह बज चुके हैं। सीजेपी के छात्रों ने मंत्री जी से ऐसा 'आउट ऑफ सिलेबस' सवाल पूछा कि मंत्री जी बिना री-चेकिंग के ही फेल हो गए। कॉकरोचों ने इस बार नाली से निकलकर सीधे मंत्रालय की फाइलों में ऐसा हमला किया की मंत्री की कुर्सी ही स्वाहा हो गई! ये 21वीं सदी के कॉकरोच हैं भाई इन पर लाल काला या भगवा हीट भी अप्रभावी है। सीजेपी आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर एक नारा गूंज रहा था—"पर्चा तुम लीक कराओगे, कुर्सी हम लीक कर देंगे!" और देखिए, बात कितनी सच साबित हुई। कल तक जो हुक्मरान वातानुकूलित कमरों में बैठकर 'कमेटी-कमेटी' खेल रहे थे, आज उन्हें जनता ने 'घर-घर' खेलने भेज दिया है। आज देश के शिक्षा मंत्रालय में एक दृश्य घटित हुआ। जहां 'भगवान' की भूमिका में देश का त्रस्त, पेपर-लीक से पीड़ित छात्र (सीजेपी आंदोलन के लड़ाके) थे, और उनके सामने किसी मुजरिम की तरह नजरे झुकाए हुए अपनी कुर्सी गंवा चुके पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री खड़े थे!
यह इस्तीफा महज़ एक पद का जाना नहीं है, बल्कि उस बहरेपन का परमानेंट इलाज है जो युवाओं की सिसकियों को 'विपक्ष की साजिश' समझ लेता था। मंत्री जी को ऐसा मीठा दर्द मिला है कि वो 'ऊफ' भी नहीं कर पा रहे हैं।
आज देश का हर छात्र सीढ़ियों पर खड़ा होकर कह सकता है—"हां भगवान, आज हम खुश हैं! क्योंकि आज तुम्हारे इस न्याय के मंदिर में उस व्यवस्था ने माथा टेका है, जिसने युवाओं के सपनों की सरेआम नीलामी की थी। दीवार टूट चुकी है, और कॉकरोच जीत चुके हैं!"
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