युवाओं का भविष्य: झारखंड में भर्ती घोटालों का अंतहीन सिलसिला -- धर्मेंद्र कुमार
युवाओं का भविष्य: झारखंड में भर्ती घोटालों का अंतहीन सिलसिला -- धर्मेंद्र कुमार
झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य को संवारने वाला झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) जैसी संस्थाएं आज खुद भ्रष्टाचार, पेपर लीक और साठगांठ के दलदल में धंसी नजर आ रही हैं। हाल ही में सामने आए 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा विवाद और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में हुई अनियमितताओं ने पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को जमींदोज कर दिया है।
भ्रष्टाचार की इस व्यवस्था में घोटालों का जो तंत्र सामने आया है, वह चौंकाने वाला है। हालिया 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में एक ऐसा ओएमआर (OMR) शीट वायरल हुआ, जिसमें बिना नेगेटिव मार्किंग के 100 में से मात्र 48 सवाल टिक करने वाले छात्र को भी पास घोषित कर दिया गया। इस पूरे खेल के पीछे मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) नामक आउटसोर्सिंग एजेंसी का नाम सामने आया है। इस एजेंसी को जेएसएससी ने मई 2025 में ही ब्लैकलिस्टेड घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद जेपीएससी की मुख्य परीक्षाओं का ठेका इसी कंपनी को सौंप दिया गया।
घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि TDPL कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर अभय (मनोज) तिवारी खुद को और अपने भाई-बहू को JSSC-CGL के जरिए सरकारी पदों पर चयनित करवाने में सफल रहा। इतना ही नहीं, उसका भाई 14वीं JPSC (PT) परीक्षा में भी पास पाया गया! विपक्ष का आरोप है कि राज्य में अधिकारी बनने के लिए ₹40 लाख की एक तय दर (रेट कार्ड) चल रही है—जिसमें ₹5 लाख पीटी, ₹25 लाख मेंस और ₹10 लाख इंटरव्यू के लिए वसूले जा रहे हैं। इससे पहले, जेएसएससी एक्साइज कांस्टेबल परीक्षा में तो पुलिस ने परीक्षा से ठीक पहले सॉल्वर गैंग के 150 से अधिक लोगों और अभ्यर्थियों को एक साथ गिरफ्तार किया था, जहां प्रति छात्र ₹3 लाख से ₹15 लाख तक की डीलिंग की बात सामने आई थी।
जेपीएससी में गड़बड़ियों का पुराना इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब जेपीएससी के कारनामों पर उंगली उठी है। झारखंड गठन के बाद से पिछले 23 वर्षों में शायद ही कोई ऐसी परीक्षा रही हो जो निर्विवाद पूरी हुई हो। पहली व दूसरी सिविल सेवा परीक्षा (2003-2006) में बड़े पैमाने पर भाई-भतीजावाद और ओएमआर शीट में हेरफेर के आरोप लगे थे, जिसकी जांच 12 साल बाद भी चलती रही और साल 2024 में सीबीआई (CBI) ने पूर्व चेयरमैन दिलीप कुमार प्रसाद सहित 60 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। वहीं 7वीं से 10वीं संयुक्त परीक्षा (2021) के दौरान एक ही परीक्षा केंद्र से लगातार कई रोल नंबर वाले छात्रों के पास होने और 57 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट गायब होने का गंभीर मामला सामने आया था।
सरकार की कार्रवाई
छात्रों के बढ़ते जनाक्रोश और चौतरफा दबाव के बीच राज्य सरकार ने बैकफुट पर आते हुए कड़े कदम उठाए हैं। 25-26 जुलाई 2026 को होने वाली 14वीं JPSC मुख्य परीक्षा को सरकार ने तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। वहीं मामले की गहराई से जांच के लिए सीआईडी (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। भारी विवाद के बीच JPSC के अध्यक्ष एल. खियांग्ते को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सीआईडी ने अब तक जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह सहित 10 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
विपक्ष की भूमिका और प्रदर्शन
जेपीएससी में हुए भर्ती घोटाले के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल (भाजपा) और स्थानीय छात्र संगठनों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर रखा है। वहीं विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी लगातार पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा पूरे राज्य में मशाल जुलूस निकाले गए और युवाओं द्वारा रांची के बापू वाटिका के सामने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह प्रदर्शन किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार युवाओं के रोजगार के अधिकार को 'नौकरी बेचने वाले गिरोहों' के हाथों बेच चुकी है और सत्तारूढ़ गठबंधन इस पर चुप्पी साधे हुए है।
बार-बार होने वाले ये भर्ती घोटाले केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं हैं, बल्कि यह उस युवा शक्ति के साथ विश्वासघात है जो दिन-रात मेहनत कर राज्य निर्माण में योगदान देने का सपना देखती है। कड़े कानून और जांच तो अपनी जगह हैं, लेकिन जब तक परीक्षा नियामक संस्थाओं की स्वायत्तता और शुचिता बहाल नहीं होगी, तब तक झारखंड के युवाओं का विश्वास जीत पाना असंभव होगा।
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