भ्रष्टाचार है किसका यार ?
--धर्मेंद्र कुमार
भारत में भ्रष्टाचार पर राजनीति करना शायद सबसे आसान काम है। विपक्ष में रहते हुए हर पार्टी भ्रष्टाचार को खत्म करने का दावा करती है, लेकिन सत्ता में आते ही वही पार्टी आकंठ तक भ्रष्टाचार में डूब जाती है। "जीरो टॉलरेंस" का नारा हर चुनाव में गूंजता है। पर ज़मीन पर टॉलरेंस जीरो है और मौतें लगातार बढ़ रही हैं। भ्रष्टाचार अब सिर्फ रिश्वत नहीं रहा। अब ये नल से, सड़क से, पुल से और शेड से गिरकर जान ले रहा है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2024 रिपोर्ट के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में 180 देशों में भारत 93वें स्थान पर है। स्कोर 100 में से 39। यानी "समस्या गंभीर" है। वहीं हर साल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) संसद में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की "अनियमितता, वित्तीय चूक और बर्बादी" की रिपोर्ट देता है। पर रिकवरी कितनी? इसकी कोई जानकारी नही। सीबीआई के आंकड़े कहते हैं कि भ्रष्टाचार के 100 केस में सिर्फ 22-23 में सजा होती है। बाकी 77 केस 10-15 साल कोर्ट में "लंबित" रहकर दम तोड़ देते हैं। मतलब भ्रष्टाचार में जोखिम कम है, और मुनाफा ज्यादा है। इसलिए भ्रष्टाचार एक "बिजनेस मॉडल" बन गया है।
कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाली बीजेपी ने जब सत्ता संभाली, तो जनता को उम्मीद थी कि अब पारदर्शिता और ईमानदारी का दौर आएगा। लेकिन देश के विभिन्न क्षेत्रों में घटी घटनाओं की सच्चाई कुछ और ही कहानी कहती है।
• मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर लैंडस्लाइडिंग: करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस हाईवे पर बार-बार हादसे होते हैं। यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि निर्माण में हुई भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार की गवाही है।
• मेरठ–दिल्ली एक्सप्रेसवे के गड्ढे: देश के सबसे बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स में से एक पर बने गहरे गड्ढे सरकार की नीयत और इंजीनियरिंग की पोल खोलते हैं। जनता की जान से खिलवाड़ हुआ, लेकिन जिम्मेदारी तय करने के बजाय लीपापोती की गई।
• इंदौर में सीवरेज का पानी: जिस शहर को ‘स्वच्छता में नंबर 1’ बताया जाता है, वहीं दूषित पानी पीने से बच्चों की मौत हो जाती है। यह घटना साफ करती है कि चमकदार रिपोर्ट कार्ड के पीछे कितनी गंदगी छिपी है।
• लखनऊ जिम में आग: सुरक्षा मानकों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के कारण कई बच्चो की हुई। लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
• मोरबी पुल हादसा (गुजरात): सैकड़ों लोगों की मौत इस बात का सबूत है कि भ्रष्टाचार केवल पैसों की चोरी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनता की जिंदगी से खिलवाड़ है।
• दिल्ली IGI एयरपोर्ट T1, जून 2024 को मानसून की पहली बारिश में ढह गया 450 करोड़ से बना नया टर्मिनल भ्रष्टाचार की गवाही देता है। इस घटना में 1 यात्री की मौत, 6 लोग घायल हुए। सवाल है कि इस स्ट्रक्चर का ऑडिट किसने किया था?
• बिहार में जून-जुलाई 2024 में मात्र 20 दिन के अंदर 12 पुल और पुलिया गिरे। जो बिहार में बहती भ्रष्टाचार की गंगा की कहानी बंया करते है। ना कोई बाढ़ ना कोई भूकंप लेकिन अररिया, सिवान, मधुबनी, किशनगंज में निर्मित व निर्माणाधीन पुल गिर गए।
• NEET-UG पेपर लीक ने पूरी सिस्टम की पोल खोल कर रख दी। 24 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर लगाने वाली इस गूंगी बहरी सरकार को कोई फर्ख नहीं पड़ता है। पेपर 10 लाख में बिका। पेपर लीक केकारण आधा दर्जन बच्चों ने आत्महत्या की।
इन घटनाओं में दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की जान गई। लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया हर बार एक जैसी रही—जांच कमेटी, बयानबाज़ी और फिर चुप्पी। कार्रवाई के नाम पर लीपापोती होती रही और असली दोषियों को बचाया जाता रहा।
भ्रष्टाचार अब किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं रहा। यह सत्ता का स्थायी साथी बन चुका है। जो पार्टी कल तक भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लगा रही थी, आज वही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी संरक्षक बन गई है। जनता के लिए यह सवाल अब और भी कड़वा हो गया है—भ्रष्टाचार है किसका यार?
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