संदर्भः- राज्यसभा चुनाव 2026
झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनीति केवल संख्याओं का खेल नहीं, बल्कि रणनीति और गठबंधन प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इस चुनाव में झामुमो के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवाणी की जीत हुई, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा हार गए। जिसकी संभावना मीडिया द्वारा पहले से बताई जा रही थी।
संख्या बल और वास्तविकता
इंडिया गठबंधन के पास दो तीट के लिए 56 विधायकों का पर्याप्त संख्या बल था। कांग्रेस को भरोसा था कि झामुमो और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर वह आसानी से जीत दर्ज करेगी। लेकिन परिणाम ने यह दिखाया कि केवल अंकगणितीय समीकरण ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि राजनीतिक समीकरण भी उतने ही अहम होते हैं। जहां जेएमएम प्रत्याशी बैद्धनाथ राम को 30 वोट मिले वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले जबकि बीजेपी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी को 28 वोट मिले। वहीं 3 वोट अयोग्य करार दिए गए। इसके बावजूद कांग्रेस को 5 वोट कम मिले। जो कहीं ना कहीं पार्टी के चुनाव प्रभारी के रणनीतिक चूक के कारण ही हुआ है।
कांग्रेस की रणनीतिक चूक
कांग्रेस ने बिना गठबंधन के सहयोगी दलों के विधायकों को विश्वास में लिये प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित कर दिया। जिसके कारण अंतिम क्षण तक उनकी उम्मीदवारी पर गठबंधन के भीतर व्यापक सहमति नहीं बना सकी। इस राज्यसभा चुनाव में झामुमो और अन्य सहयोगियों के साथ तालमेल की कमी साफ दिखी। कांग्रेस के आरोप-प्रत्यारोप से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस अपने सहयोगियों के बीच भरोसा कायम रखने में असफल रही। कहीं ना कहीं यह कांग्रेस की एक बड़ी रणनीतिक चूक है। जिसके कारण भविष्य में पार्टी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
क्रॉस वोटिंग का आरोप और खंडन
कांग्रेस ने हार के बाद अपने सहयोगियों पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाया। यह कांग्रेस द्वारा जल्दबाजी में उठाया गया कदम कहा जा सकता है। पार्टी को इससे बचना चाहिए था। वहीं दूसरी ओर माले और राजद ने इन आरोपों का सीधे तौर पर खंडन किया। यह खंडन न केवल कांग्रेस की स्थिति को कमजोर करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि गठबंधन के भीतर विश्वास की कमी गहराती जा रही है।
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नाथवाणी की जीत और गठबंधन में सेंध
परिमल नाथवाणी की जीत ने यह साफ कर दिया कि भाजपा ने रणनीतिक रूप से कांग्रेस को कमजोर करने में सफलता पाई। झामुमो के भीतर से समर्थन मिलने की संभावना और क्रॉस वोटिंग की चर्चा ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। यह चुनाव केवल एक सीट की हार नहीं, बल्कि गठबंधन की विश्वसनीयता पर गहरी चोट है।
झारखंड राज्यसभा चुनाव का यह परिणाम कांग्रेस के लिए एक चेतावनी है। पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद हार यह दर्शाती है कि रणनीतिक चूक और गठबंधन प्रबंधन की कमजोरी किसी भी चुनावी गणित को पलट सकती है। इंडिया गठबंधन में सेंधमारी का यह उदाहरण बताता है कि यदि कांग्रेस ने अपनी रणनीति और संवाद को मजबूत नहीं किया, तो भविष्य में और भी बड़े राजनीतिक संकट का सामना उन्हें करना पड़ सकता है।
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