झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी सेवानिवृत्त अमित खरे की नियुक्ति पीएमओ में सलाहकार के पद पर की गई है. श्री खरे 2 साल के अनुबंध पर इस पद पर रहेंगे. इससे पहले श्री खरे केन्द्र में सूचना प्रसारण एवं शिक्षा विभाग में सचिव के पद पर रह चुके हैं. संयुक्त बिहार के समय में कई जिलों के जिला अधिकारी रहे श्री खरे 30 सितंबर को प्रशासनिक सेवा से निवृत्त हुए. उन्होंने 36 वर्षों तक अपनी सेवाएं एक प्रशासक के रूप में देश व राज्य को दी. एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में उन्हें याद किया जाता रहेगा. अमित खरे 1985 बैच के संयुक्त बिहार कैडर के प्रशासनिक अधिकारी थे. उनका कैरियर शानदार रहा है. सेवा कार्य के दौरान राज्य और केंद्र में कई पदों पर कार्य किया. भारत की नई शिक्षा नीति 2020 को लागू कराने में भी उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. श्री खरे की पत्नी निधि खरे भी आईएएस अधिकारी हैं. वे जमशेदपुर में डीसी रह चूकी हैं।झारखंड कैडर के अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ एवं इमानदार पूर्व आईएएस अमित खरे प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में नियुक्त किए गए हैं. श्री खरे राज्य के विकास आयुक्त, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण शिक्षा मंत्रालय के सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं. श्री खरे ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए. आईआईटी आईआईएम जैसे राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने पर उन्होंने जोर दिया और पहल की।तकनीकी संस्थानों में इनोवेशन को बढ़ावा दिया. जिसका फायदा देश की जनता को कोरोना काल में देखने को मिला. श्री खरे चर्चा में उस समय आए जब करोड़ों रुपए के चारा घोटाले का चाईबासा में डेप्युटी कमिश्नर रहने के दौरान उन्होंने खुलासा किया. इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव की कुर्सी तो गयी ही, उसने उनके राजनीति को काफी प्रभावित किया है. इस मामले में उन्हें उन्हें सजा भी हुई. श्री खरे अगस्त 2021 तक केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव के अतिरिक्त प्रभार में भी रहे. चाईबासा में उपायुक्त रहने के दौरान डायन हत्या के खिलाफ सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर डायन प्रथा के उन्मूलन के लिये चल रहे प्रयासों में सहयोगात्मक रूप से याद किए जाते रहेंगे. संयुक्त बिहार में वे पटना, दरभंगा के जिलाधिकारी रहे. बिहार में मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा कंबाइंड कराकर मेधा घोटाले को रोका।
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