जिसमें सबसे चर्चा का विषय काशीडीह स्थित दुर्गा पूजा पंडाल बना रहा। अभय सिंह के पंडाल के बगल में मंदिर में भोग वितरण की सूचना पाकर उपायुक्त सूरज कुमार खुद वहां पहुंचे भोग वितरण रुकवा दिया। जहां काशीडीह दुर्गा पूजा कमेटी के सर्वे सर्वा माने जाने वाले भाजपा नेता अभय सिंह के द्वारा इसके खिलाफ जिला उपायुक्त सूरज कुमार से बहस चर्चा में रही।उन्होंने पंडाल जला देने और मस्जिद में अतिक्रमण होने जैसे बातें कही। साथ ही उन्होंने प्रोटोकॉल के नाम पर धार्मिक आस्था से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए अभय सिंह ने साफ कह दिया था कि पूजा समितियां भोग बनायेंगी भी और बाटेंगी भी। हालांकि उपायुक्त ने सूझबूझ से वहां भोग वितरण घर घर भोग पहुंचाने की व्यवस्था कमेटी से करवाई लेकिन फिर से एक बार फिर मामला गर्म हो गया जब कदमा रांकिनी मंदिर में भी बांटे जा रहे भोग को जब प्रशासन ने रुकवाया। उसके बाद फिर अभय सिंह प्रशासन के खिलाफ हमलावर हो गए और जिला प्रशासन पर सिदगोड़ा, काशीडीह और कदमा में सरकार के इशारे पर हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने का आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया और चेताया कि जब तक जिला प्रशासन माफी नहीं मांगता है तब तक वह मूर्तियों का विसर्जन नहीं करेंगे और तो और मुद्दे उठाकर धार्मिक संगठनों से मदद की अपील तक कर डाली।
इधर दूसरी ओर न्यू सिदगोड़ा सिनेमा मैदान स्थित दुर्गा एवं काली पूजा समिति के पंडाल का गुंबद और वहां रखे गमलों को जमशेदपुर सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट, सिदगोड़ा थाना प्रभारी और पुलिस बल ने आधी रात को हटवा दिया। इसके बाद फिर से एक बार सियासत शुरू हो गई एक ओर समिति के अध्यक्ष चंद्रगुप्त सिंह ने कहा है कि यह सिटी एसपी कि सरासर मनमानी है। उन्होंने कहा कि हमने कोरोना की गाइड-लाइन का पालन करते हुए मीडियम साइज का पंडाल बनाया था।वहां बैरिकेडिंग की गई थी और माताएं बहनें मूर्ति का दर्शन 75 फीट की दूरी से कर रही थीं, लेकिन आधी रात को सिटी एसपी दल-बल के साथ पहुंचे और वहां की गई बैरिकेडिंग को हटवा दिया। गमलों को किनारे करवा दिया और सुबह 4.30 बजे पुलिस ने मंदिर के ऊपर का गुंबद भी हटा दिया। सिंह ने कहा कि यहां 1953 से पूजा-अर्चना होती आ रही है। हम शासन प्रशासन के निर्देशों के अनुरूप पूजा करते आ रहे हैं। इस बार भी हमने सरकार की जो गाइड-लाइन थी उसका पूरी तरह से पालन किया था, लेकिन सिटी एसपी व्यक्तिगत द्वेष में आकर इस तरह की कार्रवाई कर रहे हैं।चंद्रगुप्त सिंह ने कहा कि वे सिटी एसपी की इस कार्रवाई का विरोध मुख्यमंत्री से भी जाकर करेंगे।
बहरहाल स्थिति में प्रशासन और पुलिस के प्रति दुर्गा पूजा कमिटियों में दुर्भावना व्याप्त हो रही थी और इस बार भी अभय सिंह हीरो बन कर उभरे। वहीं दूसरी ओर महा नवमी के दिन कन्या भोज के बाद मीडिया से बात करते हुए बन्ना गुप्ता ने दुर्गा पूजा के दौरान ऊहापोह की स्थिति में भी अपने शातिराना राजनीतिक अंदाज में यह कहकर सबको चौंकाने का असफल प्रयास किया कि समाज और आस्था से जुड़े विषयों पर जिला प्रशासन को थोड़ी समझदारी से काम लेना चाहिए।साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन मंत्री के नाते पूजा समितियों को हुई तकलीफ और परेशानी के लिए माफी भी मांगी। जिसके कई मायने राजनीतिक गलियारे में निकाले जा रहे हैं और फिर से एक बार यह चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगो में यह चर्चा विषय बना हुआ है की जो मंत्री घटना के बाद अफसोस जताने से नहीं चूक रहे है क्या वही पूजा के पूर्व जिला प्रशासन को पूजा के दौरान नरमी बरतने का निर्देश नही दे सकते थे। जिस प्रकार जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा भोग वितरण और पूजा पंडाल के साथ तानाशाही रवैया अपनाया है क्या उसके लिए जिला प्रशासन के साथ साथ सूबे के मंत्री भी दोषी नहीं ? यह बड़ा सवाल है भले मंत्री माफी मांग कर इस मामले को समाप्त करने का प्रयास किए हो लेकिन कहीं न कहीं हिंदू पूजा के दौरान इन घटनाओं से व्यथित है और वह सरकार और मंत्री के खिलाफ अब आर पार करने का मन बना चुका है।
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