गर्म हवा तेजी से ऊपर आती है, जहां उसको नमी मिलती है, जो बाद में घने बादल का निर्माण करती है। इस वजह से खाली हुई जगह को भरने के लिए नम हवा तेजी से नीचे जाकर फिर ऊपर की ओर उठती है। ऐसे में जब हवा तेजी के साथ इसके ऊपर चक्कर काटती हे तो घने बादल कड़कती बिजली के साथ बारिश करते हैं। इसका बड़ा रूप ही चक्रवात बनता है, जो अपने साथ-साथ तेज हवाएं और बारिश लेकर आता है।
अरब सागर में तेज होते चक्रवात वैज्ञानिकों की चिंता का सबब बने हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री चक्रवात का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और उसके कारण समुद्र के तापमान में बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे निपटने के लिए प्रयास तेज करने होंगे, क्योंकि इस तरह के चक्रवात तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाते हैं।
बदलते दौर के साथ ये गर्म पानी का विशाल कुआं बन गया है, जो तीव्र चक्रवातों का जन्म देता है। बीते वर्ष ही भारत ने एम्फान, निसर्ग और निवार चक्रवाती तूफान का सामना किया था। जानकारों की माने तो तूफानों की ताकत हर वर्ष 8 फीसद की दर से बढ़ रही है।भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, बीते एक दशक के दौरान अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उठने वाले चक्रवाती तूफानों की संख्या में 11 प्रतिशत वृद्धि हुई है। जानकार मानते हैं कि समुद्री सतह का तापमान बढ़ने से चक्रवात अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं। टोक्टे के समय में अरब सागर का तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों की मानें तो जैसे जैसे समुद्र का तापमान बढ़ता जाएगा चक्रवातों की शक्ति भी उतनी ही तेजी से बढ़ती जाएगी।अभी हम टोक्टे चक्रवाती तूफान की तबाही से उबर भी नही पाए है की मौसम विभाग के अनुसार कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। विभाग के अनुसार चक्रवात यास बंगाल की खाड़ी में बन रहा है। यह पश्चिम बंगाल व ओडिशा के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात यास 25 मई के आसपास बंगाल की खाड़ी में बनकर तैयार होगा। इसके बाद यह उत्तर-पश्चिम दिशा का रुख करते हुए बंगाल और फिर 26 मई को ओडिशा के तट पर पहुंचेगा।
No comments:
Post a Comment