Tuesday, November 4, 2025

अत्यंत अद्भुत गुणकारी है चुनावी मौसम में श्री सत्ता नारायण भगवान की कथा ✍️धर्मेंद्र कुमार


जब-जब लोकतंत्र संकट में आता है, तब-तब श्री सत्ता नारायण भगवान अवतरित होते हैं. उनका आगमन न तो पुष्पक विमान से और न ही किसी तपस्वी की तपस्या से बल्कि वे आते हैं चुनाव आयोग की घोषणा के साथ, और जाते हैं परिणाम की घोषणा के बाद. इस दौरान वे जनता के बीच चमत्कार करते हैं, वादों की वर्षा करते हैं, और हर गली-नुक्कड़ में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं.
 अवतार की लीला
श्री सत्ता नारायण भगवान के अवतार अनेक रूपों में होते हैं, कभी वे किसान के हमदर्द बनते हैं तो कभी बेरोजगारों के मसीहा. चुनावी मौसम में उनके चमत्कारों की गति इतनी तीव्र होती है कि पांच सालों की निष्क्रियता एकदम से सक्रियता में बदल जाती है. सड़कें बनती हैं, घोषणाएं होती हैं, और जनता को याद दिलाया जाता है कि "आप ही हमारे मालिक हैं" बशर्ते वोट सही बटन पर पड़े.
 प्रसाद वितरण
श्री सत्ता नारायण भगवान की कथा में प्रसाद का विशेष महत्व होता है. भक्तों को मुफ्त राशन, मुफ्त बिजली, और मुफ्त वादों का प्रसाद मिलता है. कुछ विशेष भक्तों को तो टिकट नामक अमृत भी मिलता है, जिससे वे स्वयं सत्ता के हिस्सेदार बन जाते हैं. इस प्रसाद की गुणवत्ता चुनाव के बाद स्वतः समाप्त हो जाती है, जैसे ही भगवान बैक टू रियलिटी मोड में लौटते हैं.
 कथा की पुनरावृत्ति
हर चुनावी मौसम में वही कथा दोहराई जाती है कि "हमने किया", "हम करेंगे", "वे निकम्मे थे", "हम महान हैं". जनता, जो इस कथा की श्रोता है, हर बार नए कथा वाचकों के माध्यम से वही पुरानी सत्ता नारायण की कथा सुनती है. फर्क बस इतना है कि इस बार कथा वाचकों की वाणी में और भी अधिक डिजिटल प्रभाव है, रिल्स, ट्वीट्स और वायरल वीडियो के रूप में.
 भक्तों की श्रद्धा
श्री सत्ता नारायण भगवान के भक्तों की श्रद्धा अडिग होती है. वे हर बार विश्वास करते हैं कि इस बार भगवान सचमुच कल्याण करेंगे. वे भूल जाते हैं कि पिछली बार भी यही कथा थी, बस कथा वाचक बदले थे. भक्तों की स्मृति इतनी क्षीण होती है कि वे पांच साल की पीड़ा को पांच मिनट के प्रवचन में भूल जाते हैं.
कथा का फलादेश
कथा का अंत हमेशा एक ही होता है, कुछ भक्त निराश होते हैं, कुछ सत्ता में शामिल हो जाते हैं, और कुछ अगले चुनाव तक फिर से तपस्या में लीन हो जाते हैं. श्री सत्ता नारायण भगवान अगली बार जब फिर अवतरित होंगे तो फिर वही कथा सुनाई जाएगी, और फिर वही प्रसाद वितरित होगा.  चुनावी मौसम में श्री सत्ता नारायण भगवान की कथा अत्यंत गुणकारी है. यह जनता को आशा देती है, नेताओं को मंच देती है, और लोकतंत्र को तमाशा बना देती है. यह कथा हर पांच साल में दोहराई जाती है, और हर बार हम इसे "नया युग" मानकर सुनते हैं. सच्चाई यही है कि श्री सत्ता नारायण भगवान की कथा का श्रवण और प्रसाद ग्रहण के बिना लोकतंत्र व जनता का कल्याण संभव ही नहीं है. इति श्री सत्ता नारायण कथा समाप्तः.

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