Thursday, September 25, 2025

बिहार में भ्रष्टाचार पर बवाल, चुनाव में किस पार्टी की गोटी होगी लाल? धर्मेंद्र कुमार

पटना। जन सुराज पार्टी के संयोजक प्रशांत किशोर ने एनडीए के मंत्रियों व नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद बिहार की राजनीति में भुचाल आ गया है. वहीं भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे इंडिया गठबंधन के नेता तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को थोड़ी राहत मिलती दिख रही है. भ्रष्टाचार से जीरों टोलरेंशन की बात कहने वाली भाजपा और जदयू (एनडीए) के समक्ष भी संकट उत्पन्न हो गया है.  जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने आरोपों को न केवल सार्वजनिक किया, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के साथ एक संगठित राजनीतिक चुनौती के रूप में पेश किया है. इसके बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है. एनडीए के नेता व मंत्री अपने उपर लगे आरोपों के जवाब देने के बजाए प्रशांत किशोर पर सेल कंपनियों से बड़ी मात्रा में पैसे लेने का आरोप लगा रहे हैं. 

 किस पर क्या है आरोप ?
प्रशांत किशोर ने पिछले दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनडीए के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. उन्होंने बीजेपी के विधायक व उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर हत्या मामले में नाबालिग बताकर रिहाई के साथ ही फर्जी डिग्री और नाम बदलने का आरोप लगाया. किशोर ने कहा कि चौधरी के पास मैट्रिक पास होने का प्रमाण नहीं हैं. वहीं जदयू के नेता औऱ मंत्री अशोक चौधरी  पर ₹200 करोड़ की बेनामी संपत्ति खरीदने का आरोप लगाया. किशोर ने आरोप लगाया कि संपत्ति ट्रांसफर में पारिवारिक ट्रस्ट की भूमिका रही है जिसकी जांच होना चाहिए. आयकर नोटिस के बाद संदिग्ध लेन-देन किया गया.
वहीं भाजपा नेता व मंत्री मंगल पांडे की पत्नी के बैंक खाते में ₹2.12 करोड़ की अघोषित राशि होने के साथ ही दिल्ली में फ्लैट खरीद मामले में किए गे फर्जीवाड़े का आरोप प्रशांत किशोर ने लगाया. बीजेपी के सांसद संजय जायसवाल पर पेट्रोल पंप से फर्जी बिलिंग के साथ ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जयसवाल पर हत्या के आरोप के साथ ही सिखों के मेडिकल कॉलेज को हड़पने का दावा किया है.
प्रतिक्रिया और बवाल
इन आरोपों के बाद भाजपा और जदयू में खलबली मच गई है. जहां जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार के उपर अब तक भ्रष्टाचार के कोई आरोप नहीं है. इसलिए पार्टी की साख को बचाने के लिए नेताओं को अपने उपर लगे आरोपों का जवाब देना चाहिए. नीरज कुमार ने अशोक चौधरी से सार्वजनिक जवाब मांगते हुए पार्टी की साख बचाने की अपील की. वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता आर.के. सिंह ने कहा कि यदि आरोप झूठे हैं तो संबंधित नेताओं को मानहानि का मुकदमा करना चाहिए. लेकिन अब तक किसी भी मंत्री ने आरोपों का स्पष्ट खंडन नहीं किया है. यह चुप्पी जनता के बीच संदेह को और गहरा कर रही है. 

कहां है जीरो टोलरेंश की सरकार ?
प्रशांत किशोर ने बीजेपी एवं जदयू के नेताओं पर ना सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोप लगाये बल्कि उससे संबंधित दस्तावेज भी सार्वजनिक किया. बावजूद इसके भ्रष्टाचार से जीरो टोलरेंश की बात करने वाली नीतीश सरकार की खोमोशी इन आरोप कहीं पुख्ता करती नजर आती है. आय से अधिक मामलों में जहां विपक्षी नेताओं के खिलाफ ईडी कार्रवाई करने में जितनी तत्परता दिखाती है वहीं इस मामले ईडी के द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाना व कार्रवाई नहीं किया जान मोदी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति दोहरे मापदंड को दिखाता है. 

प्रशांत किशोर ने भ्रष्टाचार को एक नैतिक मुद्दा बनाकर जनता के बीच अपनी साख मजबूत की है. उनके आरोपों ने एनडीए की "सुशासन" की छवि को गहरा आघात पहुंचाया है. राजनीति जानकारों की माने तो जहां प्रशांत किशोर ने खुद को एक ईमानदार विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है. वहीं बैठे बिठाए विपक्ष को सत्ता पक्ष के खिलाफ एक मजबूत मुद्दा मिल गया है.  राजद और कांग्रेस अब इन आरोपों को चुनावी हथियार बनाकर चुनावी वैतरणी पार करने का हरसंभव प्रयास करेंगे. और यदि एनडीए की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया, तो भाजपा-जदयू की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगना तय है. भ्रष्टाचार के आरोपों ने बिहार की राजनीति को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है. अब यह देखना लाजमी होगा कि सत्ता पक्ष के नेता व मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का चुनाव पर कितना असर पड़ता हैं.

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