Wednesday, September 17, 2025

अध्यक्ष पद के कई दावेदार, कौन होगा एकजुटता का सूत्रधार? -- धर्मेंद्र कुमार

जमशेदपुर। झारखंड की राजनीति में पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव एक साधारण संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पार्टी के आला नेताओं के लिए एक गहरी राजनीतिक परीक्षा है. पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की दहलीज़ पर खड़ा है. 2025 का अध्यक्षीय चुनाव न केवल संगठन के भीतर शक्ति संतुलन को परिभाषित करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि कांग्रेस की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी. इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है, जिसमें पुराने अनुभव, नई ऊर्जा और संगठनात्मक संतुलन के बीच संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. पार्टी आलाकमान द्वारा पूर्वी सिंहभूम जिला के लिए गुजरात के विधायक अनंत पटेल को पर्वेक्षक बनाया गया है. अनंत पटेल लगातार पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से रायशुमारी कर रहे हैं. अब यह देखना लाजमी होगा कि पटेल कार्यकर्ताओं से की गई बातचीत व रायशुमारी के आधार पर निर्णय लेते है या फिर गणेश परिक्रमा वाली परंपरा को ही आगे बढ़ाते हैं. कांग्रेस पार्टी में गणेश परिक्रमा करने वालों को प्राथमिकता देने की परंपरा रही है. पूर्व में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बालमुचू ने तमाम विरोध के बावजूद अपने प्रिय रविन्द्र कुमार झा उर्फ नट्टू झा को पूर्वी सिंहभूम कांग्रेस पार्टी का जिला अध्यक्ष बनाया था और वो लगभग सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष पद को सुशोभित करते रहे. वहीं जब सुखदेव भगत प्रदेश अध्यक्ष बने तो उन्होंने भी विजय खां को जिला अध्यक्ष बनाया था. विजय खां 2014 से 2022 तक अध्यक्ष रहें. फिर 2022 में प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे जी कृपा से आनंद बिहारी दुबे कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष बनें. 

60 से ज्यादा लोगों ने की दावेदारी

जिला अध्यक्ष पद के लिए लगभग 65 लोगों ने दावेदारी की हैं. पार्टी सूत्रों की माने तो एक रणनीति के तहत वर्तमान जिला अध्यक्ष आनंद बिहारी दुबे द्वारा अपने लोगों से ज्यादा से ज्यादा दावेदारी कराई गई है ताकि अध्यक्ष के चुनाव के समय वे दुबे को अध्यक्ष बनाए जाने पर अपनी दावेदारी वापस लेने की बात कर पूरा माहौल आनंद बिहारी दुबे के पक्ष में बनाया जा सके. वैसे दावेदारी करने वाले में कई पुराने कांग्रेसी है. जिनमें महेंद्र पांडे,कमलेश कुमार पांडे, अखिलेश सिंह यादव, राकेश तिवारी,विजय यादव, ज्योति मिश्रा,मनोज कुमार सिंह, अंसार खान, प्रिंस सिंह,राकेश साहू, परितोष सिंह सहित एक लंबी फेहरिस्त है. पर्यवेक्षक विधायक अनंत पटेल को अब निर्णय करना है कि वो किसको अध्यक्ष बनाए. कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा कि जो व्यक्ति पार्टी को अपना पूरा समय दे सकता हो साथ ही सच्चा कांग्रेसी भी हो वही अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करें. वर्तमान जिला अध्यक्ष आनंद बिहारी दुबे का संबंध झामुमो रहा है. यदि सच्चा कांग्रेसी होना पैमाना होगा तो कई नाम स्वतः छट जाएंगे लेकिन ऐसा होगा लगता नहीं है.   

कौन है मजबूत दमदार दावेदार 

आनंद बिहारी दुबे 2022 में जिला अध्यक्ष बने. अपने छोटे से कार्यकाल में दृढ़इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए उन्होंने पार्टी के जिला कार्यालय तिलक पुस्तकालय को जीर्णोद्धार किया. जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. हालांकि विरोधियों का कहना है कि तिलक पूस्तकालय के जीर्णोद्धार में लागत से ज्यादा खर्च बताया गया. वहीं इस पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं रखी गई. जिसकी शिकायत पार्टी के महासचिव के सी वेणुगोपाल को भी की गई है. वहीं दुबे ने संगठन को मजबूत करने के बजाय स्वंय को मजबूत करने पर ज्यादा जोर दिया और गुटबाजी को बढ़ावा दिया. अपने लोगों को उपक्रित करते हुए विभिन्न पदों पर आसिन्न किया. जिसके कारण दुबे को कई बार कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना भी करना पड़ा. यदि वे संगठन की मजबूती पर ध्यानकेंद्रित किए होते तो 2024 के लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में परिणाम कुछ और होता. जिस प्रकार लोकसभा चुनाव में झामुमो के प्रत्याशी समीर महंती ने खुले तौर पर आनंद बिहारी दुबे पर पैसे लेने का आरोप लगाया उसको झुठलाया नहीं जा सकता है. वहीं विधानसभा चुनाव में पूर्वी विधानसभा से टिकट नहीं मिलने के कारण जिस प्रकार दुबे ने कांग्रेस प्रत्याशी डा. अजय कुमार के साथ भीतरघात किया वो जगजाहिर है और लोग आज भी खुलकर इस बात की चर्चा करते है कि यदि आनंद बिहारी दुबे खुले मन से पार्टी के लिए काम किए होते तो परिणाम पार्टी के पक्ष में होता. इतना ही नहीं इनके जिला अध्यक्ष रहते हुए जमशेदपुर पश्चिम की सीटींग सीट भी पार्टी हार गई. यह सही है कि दुबे पूरा समय पार्टी को देते है उसके बावजूद यदि पार्टी जिला स्तर पर मजबूत संगठन के तौर पर खड़ा नहीं हो पायी तो इसके मायने क्या है एक बार पार्टी के वरीय पदाधिकारियों को जरुर विचार करना चाहिए.
वहीं बात अगर कार्यकारी नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनकर की करें तो डा. अजय कुमार की कृपा से वे कार्यकारी नगर अध्यक्ष बने. पार्टी में नगर कार्यकारी अध्यक्ष जैसा कोई पद अभी तक नहीं रहा है. धर्मेंद्र सोनकर के पास संगठनात्मक अनुभव की कमी है. वहीं अपने कार्यकाल में उन्होंने ऐसा कुछ बड़ा या महत्वपूर्ण कार्य नहीं किया जिसके कारण जिला अध्यक्ष पद के लिए उनकी दावेदारी थोड़ी कमजोर दिखती है. इनकी पहुंच भी सीमित है. वैसे यदि पार्टी के वरीय नेता ओबीसी को ही अध्यक्ष पद के लिए महत्वपूर्ण आधार मान कर निर्णय करना चाहे तो बात अलग है. विरोधियों के अनुसार सोनकर के उपर गंभीर आपराधिक आरोप भी लगे थे. सोनकर गणेश परिक्रमा करने में माहिर बताए जाते है. सोनकर की पहचान सोशल मीडिया नेता एवं फोटोजीवी नेता के तौर पर ज्यादा है. 
 वहीं अगर अखिलेश सिंह यादव की बात करें तो विरोधियों का स्पष्ट कहना है कि उनका भाजपाई बैकग्राउंड हैं. जमशेदपुर के ट्रांसपोर्टर सह ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मैनेजमेंट कमिटी के निर्वाचित प्रतिनिधि अखिलेश सिंह यादव ने भी जिला अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की है. हालांकि उनके विरोधियों ने आलाकमान को उनका भाजपाई बैकग्राउंड बताते हुए जिलाध्यक्ष नहीं बनाने की मांग की. आपको बता दे कि अखिलेश सिंह यादव के भाई मिथिलेश सिंह यादव झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह जमशेदपुर पूर्वी के 25 वर्षों तक विधायक रहे रघुवर दास के विधायक प्रतिनिधि थे. अखिलेश सिंह यादव को छोड़कर उनका पूरा परिवार भाजपा समर्थक रहा है. ऐसे में अखिलेश सिंह यादव को कांग्रेस संगठन में इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना से पार्टी के सिए कितना फायदेमंद होगा यह तो पार्टी के वरीय नेताओं को तय करना होगा. 
वहीं इंटक नेता एवं टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारी मनोज कुमार सिंह की बात करें तो इनकी शांत एवं निर्विवाद छवि और संगठनात्मक अनुभव जिला अध्यक्ष के लिए एक दमदार उम्मीदवार है. लेकिन मनोज कुमार सिंह टाटा मोटर्स में कार्यरत होने के कारण वे पार्टी के लिए कितना समय दे पाएंगे यह महत्वपूर्ण सवाल है. क्योंकि नौकरी पेशा होने के कारण पार्टी को पूरा समय देना उनके लिए एक बड़ी समस्या हो सकती है.
वहीं बात अगर जिला परिषद् सदस्य डा. परितोष सिंह की बात करें तो युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सहित कई पदों पर रहते हुए पार्टी को संगठित करने के साथ ही पार्टी को संगठित करने अनुभव उनके पास है. परितोष ज्यादातर कार्यकर्ताओं एवं आम लोगों के बीच रहते है. सिंह लगातार आम लोगों की विभिन्न समस्याओं पानी, बिजली, सड़क सहित मूलभुत समस्या को लेकर आंदोलन करते रहते हैं. वहीं इनकी छवि जुझारु एवं कर्मठ नेता के तौर पर है. आम लोगों के लिए सर्व सुलभ परितोष सिंह सही मायने में जिला अध्यक्ष पद के लिए एक बेहतर उम्मीदवार है. उनके खिलाफ कोई आपराधिक आरोप भी नहीं है सबको साथ लेकर चलने एवं व्यवहारिक परितोष एक प्रखर वक्ता भी है.
वहीं एक और जुझारु युवा नेता राकेश साहू जो ओबीसी से आते है. विगत दो दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस पार्टी के जुड़ कर लगातार कार्य कर रहे है. पहले एनएसयूआई फिर युवा कांग्रेस में सक्रिय रहने वाले राकेश ने भी जिला अध्यक्ष के लिए अपनी दावेदारी की है. हर मुद्दे पर अखबार की सुर्खियों में रहने वाले राकेश को मीडिया में बने रहने का हुनर है. वहीं कई महिलाओं ने जिसमें उषा सिंह, नलिनी सिन्हा, अपर्णा गुहा जैसा नेत्रियों ने भी अपनी दावेदारी पेश की है. 
कई कार्यकर्ताओं ने तो जिला अध्यक्ष के लिए सिर्फ इसलिए दावेदारी क्योंकि सभी लोग दावे कर रहे थे. वहीं कई लोग इस उम्मीद से की कहीं गलती से पार्टी के नेताओं की उनपर नजरें इनायत हो जाए. वहीं कुछ इसलिए दावेदारी की ताकि जुगाड़ तंत्र से कुछ काम बन जाए. दावेदारों की एक लंबी फेहरिस्त है. हर किसी की बात करना यहां संभव नहीं हैं.

परिणाम और प्रभाव

 जिला अध्यक्ष चुनाव का परिणाम न केवल जिला कांग्रेस की दिशा तय करेगा, बल्कि यह संकेत भी देगा कि पार्टी स्थानीय स्तर पर किस प्रकार के नेतृत्व को प्राथमिकता देती है. अनुभव और संतुलन, या आक्रामकता और लोकप्रियता. अगर गुटबाजी और आंतरिक असंतोष को नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर भी पार्टी के सेहत पर पड़ सकता है. निर्णय पार्टी के आला नेताओं को करना हैं.

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