Tuesday, November 16, 2021

झामुमो ने किया टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा कॉमिंस, नुवामुंडी व घाटकुरी खदान का गेट पर जाम


अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सुबह 11 बजे झंडा, बैनर के साथ टाटा स्टील का जेनरल ऑफस गेट, टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस गेट पर पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया. उसके बाद धरणा पर बैठ गये. जेएमएम के कार्यकर्ता जमशेदपुर से टाटा कमिंस का कार्यालय महाराष्ट्र ले जाने का विरोध कर रहे हैं. वहीं धरना प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन की ओर से पुलिस की तैनाती कर दी गई थी. ताकि विधि व्यवस्था में खलल न पड़े. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार द्वारा एक पत्र झारखंड सरकार को भेजा गया, जिसमें बताया गया था कि टाटा कॉमिंस के पैन कार्ड का एड्रेस अब महाराष्ट्र के पुणे में कर दिया गया है. परिवर्तित पता से झारखंड सरकार को कोई आपत्ति है या नहीं है. उसके बाद यह खबर सुर्खियों में आयी और इसका विरोध शुरु हो गया. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस पर कड़ा एतराज जताया. वैसे इस बात की चर्चा है कि वर्ष 2016 में ही टाटा कमिंस का कार्यालय पुणे शिफ्ट हो चुका है.

 नोवामुंडी और घाटकुरी लांग प्रोडक्ट कंपनी के गेट को भी झामुमो ने किया जाम 

दूसरी ओर झामुमो ने पूर्व घोषित हुड़का जाम कार्यक्रम के तहत टाटा स्टील की नोवामुंडी और घाटकुरी की टाटा लांग प्रोडक्ट कंपनी के मुख्य गेट को भी सुबह 6 बजे से ही जाम कर दिया है. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पश्चिमी सिंहभूम झामुमो जिलाध्यक्ष सह चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव कर रहे हैं. गेट के जाम होने की वजह से आयरन ओर की लोडिंग और अनलोडिंग का काम पूरी तरह बंद हो गया है. जिसकी वजह से एसएलपीएल खदान में लगभग 10-15 हजार टन लौह अयस्क का उत्पादन व लगभग 4 हजार टन डिस्पैच प्रभावित होने का अनुमान है.

झामुमो की है छह शर्ते
टाटा कमिंस के पैन को झारखंड से पुणे स्थानांतरित करने का प्रस्ताव तत्काल रद्ध किया जाये, पुणे से विद्युत सामग्री और अन्य सामग्रियों की खरीद बंद होनी चाहिए. इन वस्तुओं की खरीद आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित इकाइयों से की जाये, जियाडा में स्थापित ईएमसी (इलेक्ट्रिकल मैनुफैक्चरिंग सेंटर) में स्थानीय उद्यमियों की इकाई को विकसित करने में सहयोग मिलना चाहिए, विस्थापितों के लिए पुनर्वास योजना को तत्काल लागू किया जाना चाहिए, जिसमें शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं शामिल की जानी चाहिए, टाटा अपरेंटिशिप में 100 प्रतिशत भर्ती इस क्षेत्र के आदिवासी-मूलवासी को दी जानी चाहिए, सीएसआर पहलों और इसके लिए बजटीय प्रावधानों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, इसके अलावा सीएसआर कार्यक्रमों की उपलब्धि को समय-समय पर जारी किया जाना चाहिए।

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