Friday, October 8, 2021

बेहतर चिकित्सा सुविधा के अभाव में डोंगवापोसी लॉबी के लोको पायलट मनोज कुमार मुर्मू की मौत,रेल कर्मियों में शोक की लहर व आक्रोश


चाईबासा के डांगोवापोसी क्रू लॉबी में कार्यरत रेलवे लोको पायलट मनोज कुमार मुर्मू की मौत उचित चिकित्सा के अभाव में हो गई। जिससे लोको रनिंग स्टाफ में भारी शोक की लहर दौड़ गई है। रेल कर्मियों ने उनकी मौत का कारण इस क्षेत्र में रेलवे का सभी सुविधाओं से लैस अस्पताल ना होना बताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मनोज कुमार मुर्मु लोको पायलट डांगोवापोसी क्रू लाबी में कार्यरत थे। जो करीब एक सप्ताह से बीमार थे। उन्हें दस्त हो रहा था।कल सुबह में हालत बिगड़ने से उनका परिवार प्राईवेट एम्बुलेंस द्वारा नोवामुंडी समर्थित माइन्स अस्पताल ले गया था। वहां किसी तरह चिकित्सा नहीं किया गया और बैरंग लौटा दिया गया। और शाम 7 बजे तक सीरियस हो गये। उसके बाद उन्हें रेलवे डिस्पेंसरी ले जाया गया। जहां रेलवे डाक्टर सोरेन की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। बाद में उन्हे मृत घोषित कर दिया।
बताया जाता है कि मृतक बिहार का जमुई में रहने वाला है। ए आई एल आर एस ए का अगुवाई में चंदा कर मृतक लोको पायलट का शव को उनका परिवार के साथ दाह संस्कार के लिये अपना गांव जमुई भेज दिया गया। मृतक अपना पीछे बीबी और दो नाबालिग बच्चे छोड़ गये हैं।
गौरतलब है डीपीएस सेक्शन चक्रधरपुर डिवीजन को सर्वाधिक राजस्व देने वाला सेक्शन है। जहां से लौह अयस्क, मैंगनीज़ ओर, डोलोमाइट का ढुलाई की जाती है।वहीं दूसरी ओर यह क्षेत्र मलेरिया के लिए खतरनाक जोन माना जाता है लेकिन यहां चिकित्सा का घोर अभाव है। रेलवे का पूर्ण चिकित्सालय नहीं है। एक रेलवे डाक्टर और एक कम्पाऊडंर के उपर संपूर्ण डीपीएस ब्रांचलाईन स्टाफ की स्वास्थ सुविधा टिका हुआ है। डीपीएस स्थित डिस्पेंसरी में पानी चढ़ाने की सुविधा तक नहीं है ना कोई बेड उपलब्ध है। बहुत पहले टाटा कम्पनी का माइन्स हास्पिटल में रेफरल का सुविधा था जो बंद हो गया है।
रेल कर्मियों की ओर से कई बार चिकित्सा सुविधा बढ़ाने तथा पूर्ण रूपेण हास्पिटल, डाक्टर सह ईलाज का प्रर्याप्त सुविधा बढ़ाने के लिए मांग पत्र दिया गया है लेकिन इस पर रेल प्रशासन के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया है। जिसके कारण गंभीर रूप से पीड़ित कर्मचारियों उनके परिवार को चक्रधरपुर या टाटानगर रेलवे अस्पतालपताल रेफर किया जाता है। वैसी स्थिति में पीड़ित की जान जाने की ज्यादा संभावना रहती है या चली भी जाती है।

No comments:

Post a Comment