प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी संगठन की इकाई नारी मुक्ति संघ की कोल्हान प्रमंडल की प्रवक्ता फूलो बोदरा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हमारा संगठन संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 27 सितंबर को बुलाए गए भारत बंद का पूर्ण समर्थन करता है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि तीन कृषि कानूनों से झारखंडी जनता, व खासकर आदिवासी किसान व महिलाएं गंभीर रूप से प्रभावित होंगे. झारखंड के लैंड बैंक में पड़ी हजारों एकड़ भूमि उद्योगों में इस्तेमाल के बाद कॉरपोरेट खातों में ही तब्दील होगी. दूसरी ओर, कृषि उपजों की सार्वजनिक खरीद, भंडारण व वितरण खत्म होने से करोड़ों गरीब लोगों को सरकारी राशन दुकान से अनाज लेना पडेगा, तो उन्हें दो जून का भात भी नसीब नहीं होगा. खाद्यानों के वितरण पर सरकारी नियंत्रण खत्म होने के बाद बढ़ने वाली खाद्यानों की महंगाई से मध्यम वर्ग के पोषण पर भी प्रभाव पड़ेगा. झारखंड में जहां भूख से होने वाली मौत व महिलाओं व बच्चों में कुपोषण एक बहुत बड़ी समस्या है. यह कानून आकाल व महामारी की ही उद्घोषणा है. इन कानूनों से होने वाले आदिवासी किसानों का पलायन व बच्चियों व महिलाओं की तस्करी बढ़ेगी तथा रोटी के लिए झारखंडी किसानों को भारतीय शहरों व महानगरों में दर-दर भटकने व धक्का खाने पर मजबूर कर देगा. अतः नारी मुक्ति संघ, कोल्हान प्रमंडल इन तीन कृषि कानूनों का कड़ा विरोध करता है व इन्हें रद्द करने के लिए चल रहे किसान आन्दोलन का भरपूर समर्थन करता है।
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