राजधानी रांची में अवैध तरीके से बने भवनों को लेकर रांची नगर निगम सख्त हो गया है। इस कड़ी में नागरमल मोदी सेवा सदन को भी तोड़ने का आदेश जारी किया गया है। हालांकि, खुद डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय नगर आयुक्त के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। जबकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से बीच का रास्ता निकालने का आग्रह किया गया है।
1958 में बने नागरमल मोदी सेवा सदन को तोड़ने का आदेश जारी किया गया है। रांची नगर निगम के नगर आयुक्त मुकेश कुमार के द्वारा इसका जजमेंट दिया गया है। बिना नक्शा भवन निर्माण और वैध कागजात नहीं होने की बुनियाद पर अस्पताल को तोड़ने का आदेश जारी किया गया है। इतना ही नहीं नए मरीजों की भर्ती पर भी रोक लगा दी गई है। नगर आयुक्त के जजमेंट के बाद नागरमल मोदी सेवा सदन गवर्निंग बॉडी के लोगों ने बीच का रास्ता निकालने की कवायद तेज कर दी है। अस्पताल के सचिव आशीष मोदी ने बताया कि, अगर अस्पताल निर्माण में कोई विचलन हुआ है तो उसके सुधार का अवसर दिया जाए। साथ ही जनहित को ध्यान में रखते हुए अस्पताल भवन को रेगुलराइस करने का मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि, अस्पताल से आर्थिक मुनाफा कमाना उद्देश्य नहीं है बल्कि जनहित की सेवा करना है।
रांची नगर निगम के नगर आयुक्त मुकेश कुमार के अवैध भवनो को लेकर दिए गए निर्णय का खुद नगर निगम के स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। रांची के डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने कहा कि, नगर आयुक्त द्वारा दिया गया फैसला अव्यवहारिक है। लिहाजा, इसे लेकर कोर्ट की शरण में जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि, वर्षों पहले से नक्शा पास कराकर भवन निर्माण कराने को लेकर कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं था। लिहाजा लोगों में जैसे-जैसे जागरूकता आई भावनाओं को लेकर कागजी कार्रवाई को दुरुस्त किया गया। उन्होंने कहा कि, नागरमल मोदी सेवा सदन जनहित के कार्यों से जुड़ा है।
बात सिर्फ नागरमल मोदी सेवा सदन को लेकर नहीं है। बल्कि ऐसे हजारों भवनों का सवाल है जो बिना नक्शा के बनाए गए हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि, क्या इतनी बड़ी संख्या में भवनों को तोड़ा जाएगा। यही वजह है कि खुद नगर निगम के अंदर से नगर आयुक्त के खिलाफ आवाज उठने लगी है।
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