Thursday, August 26, 2021

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बढ़ी बेरोजगारी, नौकरियों पर गहराए संकट के बादल।


रक्षाबंधन के साथ ही त्योहारों के सीजन की शुरुआत हो चुकी है। इसके आगे गणेश चुतर्थी, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार आ रहे हैं। त्योहारों के दौरान बाजार तेजी पकड़ता है और आवश्यक वस्तुओं की मांग में बढ़ोतरी होती है। लेकिन इसी दौरान पूरे देश में बेरोजगारी दर की बढ़ोतरी ने चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि अगर रोजगार की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो बाजार में आवश्यक वस्तुओं की मांग में कमी बनी रह सकती है। इस समय पूरे देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.88 फीसदी हो गई है। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 9.52 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 7.13 फीसदी हो गई है।


सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने की शुरुआत में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर सात फीसदी के करीब थी जो मध्य अगस्त तक बढ़कर 7.42 फीसदी के लगभग हो गई। बीते सप्ताह में 7.91 तक पहुंचने के बाद अब यह 7.88 फीसदी तक रह गई है। इसी प्रकार शहरी बेरोजगारी दर अगस्त महीने की शुरुआत में 8.29 फीसदी, मध्य में 9.08 फीसदी और अब 9.52 फीसदी हो गई है।
खेती के कामकाज का समय होने के कारण इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत कम रही। ग्रामीण क्षेत्रों में अगस्त महीने की शुरुआत में बेरोजगारी दर 6.45 फीसदी और मध्य में 6.68 फीसदी रही। अब यह बढ़कर 7.13 फीसदी हो गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इससे लोगों की जेब में पैसा नहीं जाएगा। इससे त्योहारों के सीजन में भी एफएमसीजी उत्पादों की खपत में बढ़ोतरी नहीं होगी।
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, नोएडा के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने  बताया कि केंद्र सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी सूक्ष्म, लघु और मध्यम स्तर के उद्योगों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। जबकि देश के लगभग 12 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में यही क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। उद्योगों को लगभग 80 फीसदी श्रमिकों के सहारे काम करना पड़ रहा है, जबकि इसी दौरान मांग में बढ़ोतरी न होने से कंपनियां अपनी क्षमता से कम उत्पादन कर रही हैं।
मजे की बात है कि बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी के बाद भी सरकार का जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है। उत्पादन में कमी होने के बाद भी सकल जीएसटी संग्रह में वृद्धि के विरोधाभास के पीछे सरकार की 'वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी' बताई जा रही है। इस योजना में व्यापारी अपने पिछले दस वर्षों तक का टैक्स देय राशि बिना ब्याज चुकाए अदा कर मामला रफा-दफा कर सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में व्यापारी अपना पुराना बकाया खत्म कर रहे हैं जिसके कारण सकल जीएसटी कलेक्शन बढ़ा हुआ दिख रहा है।

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