Saturday, May 29, 2021

बकाए भुगतान के लिय दर दर की ठोकर खाने को मजबूर है,मिनी बस संचालक।



दोस्तों नमस्कार
कोरोना के संक्रमण के दौर में मेरा आप सबों से निवेदन है कि आप अनावश्यक भीड़ में जाने से बचें। मास्क और सैनेटाइजर का प्रयोग करें स्वस्थ रहें मस्त रहें।

कोरोना के प्रथम चरण में लगे लॉकडाउन से राज्य और देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी, लॉकडाउन के समाप्ति के बाद देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आई भी नही थी कि कोरोना के दूसरे लहर में एक बार फिर राज्य की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस क्रम में छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक की हालत पस्त होने लगी है । झारखंड सरकार द्वारा कोरोना के दूसरे लहर में संक्रमण के बढ़ते दर को रोकने के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के तहत पाबंदियां लगाने की वजह से बस परिचालन भी पूरी तरह ठप है जिसकी वजह से बस मालिकों सहित इस व्यवसाय से जुड़े कर्मचारी की हालत भी खराब हो गई है। कोरोना के पहले दौर में लॉकडाउन के दौरान झारखंड सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों से प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने के लिए निशुल्क बस सेवा की व्यवस्था की गई थी इसके लिए राज्य भर में सैकड़ों बसों का उपयोग सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा किया गया था। केवल पूर्वी सिंहभूम जिले में 85 बस का उपयोग प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों से लाने और उनके घर तक पहुंचाने के लिए किया गया था।
 सरकारी द्वारा 24 घंटे के लिए एक मिनीबस का दर 2250 रुपए पर तय किया गया था। सरकार द्वारा निर्धारित दर के हिसाब से केवल पूर्वी सिंहभूम जिले में बस मालिकों का लगभग 22 लाख रूपए बकाया है।जिसका भुगतान 1 वर्ष बीतने के बाद भी सरकार द्वारा नही किया गया है।
 इस क्रम में आज बस एसोसिएशन द्वारा जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भुगतान संबंधी एक ज्ञापन सौंपा गया। बस एसोसिएशन के संजय पांडे ने आई विजन से बातचीत के क्रम में बताया कि कोरोना काल के प्रथम दौर में विभिन्न राज्यों से प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने तथा 1 जिले से दूसरे जिले तक मजदूरों एवं लोगों को पहुंचाने के लिए 85 बसों का उपयोग कई दिनों तक किया गया। उन्होंने कहा कि उस विषम परिस्थिति में हमने सरकार और जिला प्रशासन का हर संभव सहयोग किया।आज हमारे द्वारा किए गए सहयोग के बदले सरकार द्वारा निर्धारित दर से बकाए भुगतान के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने बताया की जिला प्रशांत के अधिकारी द्वारा भुगतान के लिय आवंटन हेतु परिवहन आयुक्त एवम् सचिव आपदा प्रबंधन को कई बार पत्र लिखा गया है।लेकिन अब तक इस संबंध में जिला प्रशासन को आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है।
 जिला प्रशासन और सरकार के बीच पत्रों के माध्यम से वार्ता जारी है, और बस मालिकों को आश्वासन का डोज भी दिया जा रहा है लेकिन इन आश्वासन के डोज से बस मालिकों के सेहत में कोई विशेष सुधार नहीं हो रहा है, अब देखना यह होगा कि आपदा के दौरान जिस प्रकार बस मालिकों ने सरकार को सहयोग दिया और प्रवासी मजदूरों को लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।क्या सरकार भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आपदा के दौरान किए गए बस मालिकों के सहयोग का मान रखते हुए उनके बकाए का भुगतान यथाशीघ्र करती है या बस मालिकों को अभी और लंबे इंतजार का सामना करना पड़ेगा।

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