Sunday, May 23, 2021

अपने मोक्ष की राह तकती मृतकों को अस्थियां। संक्रमण के डर से लोग नहीं आ रहे है अस्थि लेने।

दोस्तों नमस्कार
कोरोना के संक्रमण के दौर में मेरा आप सबों से निवेदन है कि आप अनावश्यक भीड़ में जाने से बचें। मास्क और सैनेटाइजर का प्रयोग करें स्वस्थ रहें मस्त रहें।

वैश्विक महामारी कोरोना के दहशत का आलम यह है की अपने लोग ही अंतिम समय अपनो का साथ छोड़ दे रहे है।हिंदू संस्कृति में मृत्यु के बाद अस्थि विसर्जन एक संस्कार है ऐसी मान्यता है कि नदी में अस्थियों के प्रवाहित करने मात्र से मृतक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन कोरोना के इस महामारी में संक्रमण के डर से परिजन शवों के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो रहे है वहीं दाह संस्कार के बाद सैकड़ों अस्थि कलश अपनी मोक्ष की राह तक रही है। लोगों में कोरोना के संक्रमण का भय इस कदर हावी है कि लोग शमशान घाटों में रखी अस्थि कलश को नदी में प्रवाहित करने का तक की जोखिम नही लेना चाहते। मानव जाति के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी?
जमशेचपुर के स्वर्णरेखा और पार्वती घाट में सैकड़ों की संख्या में अस्थि कलश बिखरे पड़े है लेकिन अब तक इनको नदी में प्रवाहित कर मोक्ष प्रदान करने की बीड़ा कोई उठाने को तैयार नहीं है ना मृतक के परिजन और ना ही कोई स्वयं सेवी संस्था।दरअसल इस कोरोना ने अपनो को अपनो से दूर कर दिया है। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का प्रशासन द्वारा कठोरता से पालन कराने का परिणाम भी दिख रहा है जहां कोरोना का संक्रमण कम हुए है वहीं मौत की दर में भी कमी आ रही है। लेकिन कोरोना के दूसरे लहर ने जहां देश में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दिया,वहीं शून्य होती मानवीय संवेदनाओं से भी हमे रूबरू करा दिया है। कोरोना इस सदी का अबतक सबसे बड़ा त्रासदी है।



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