Monday, May 24, 2021

कोरोना काल में बिगड़ी सरकार की छवि, डैमेज कंट्रोल में जुटी पार्टी।


दोस्तों नमस्कार
कोरोना के संक्रमण के दौर में मेरा आप सबों से निवेदन है कि आप अनावश्यक भीड़ में जाने से बचें। मास्क और सैनेटाइजर का प्रयोग करें स्वस्थ रहें मस्त रहें।

कोरोना की दूसरी लहर ने देश में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ ही संवेदनहीन शासन व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।जिस प्रकार वैश्विक महामारी कोरोना के दूसरे अवतार ने अपना रौद्र रूप दिखाया।जितनी तबाही हुई है उसका असर तो कई वर्षों तक दिखेगा।लेकिन इस कठिन घड़ी में भी जनता के प्रति शासन व्यवस्था व सरकारों की जो संवेदनहीनता दिखी यह निश्चित रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकते और न माफ करने योग्य है। इस विषम परिस्थिति में सरकार अपनी छवि सुधारने में व्यस्त रही।झूठे आंकड़ों के आसरे लोगों को भरमाने का प्रयास किया गया।जबकि लगातार मेन स्ट्रीम मीडिया ने ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग कर लोगों को देश की हालात से रूबरू करते रहे । अस्पतालों में ऑक्सीजन एवम् दवाओं के अभाव में दम तोड़ते लोग, हर तरफ इलाज के लिए जद्दोजहद करते लोग, हर तरफ से संसाधनों की अभाव की मिल रही सूचनाओं के बावजूद समय पर सरकार द्वारा निर्णय नहीं लिए जाने के कारण जो लोग असमय काल के ग्रास बने वास्तव में उसकी जिम्मेवारी तय होनी ही चाहिए। इन सबके बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप के कई दौर भी चले। जिस प्रकार मेन स्ट्रीम मीडिया द्वारा कोरोना काल में ग्राउंड जीरो से बेहतरीन रिपोर्टिंग की गई।इससे लोगो के मन मस्तिष्क में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रति नकारात्मक छवि बनी।सरकार द्वारा डैमेज कंट्रोल के लिए तमाम आंकड़े प्रस्तुत किए लेकिन सरकारें गंगा में बहती लाशें या घाटों पर बालू में दफन किए गए सैकड़ों लाशों से उठे सवालों पर ज़बाब नही दे पाई।
 कोरोना की दूसरे लहर के दौरान जिस प्रकार उत्तर प्रदेश के लोगों ने लचर स्वास्थ्य एवम् शासन व्यवस्था का दंश झेला है।जिसके कारण उत्तर प्रदेश के लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है। 2022 में उत्तर प्रदेश में चुनाव होना है। सरकार के प्रति लोगो की नाराजगी का असर संभवतः चुनाव पर भी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हालातों को लेकर बीजेपी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व के बीच शीर्ष स्तर पर मंथन हुआ है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल रहे। बैठक में कोरोना महामारी के हालात के बीच सरकार और पार्टी की छवि को लेकर चर्चा हुई है। कोरोना की दूसरी लहर के बीच लोगों में सरकार के प्रति बढ़ी नाराजगी को देखते हुए इस बैठक को अहम माना जा रहा है। कोरोना महामारी से उत्तर प्रदेश सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक है, जहां गंगा में तैरती लाशों ने डरावना मंजर पेश किया है। ऑक्सीजन की कमी, गंगा में मिली लाशों, वैक्सीनेशन की धीमी गति जैसे कुछ मुद्दों को लेकर बीते दिनों बीजेपी बचाव की मुद्रा में दिखी है। कानून व्यवस्था से लेकर अन्य तमाम मुद्दों पर सख्त प्रशासक की छवि रखने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार पर सवाल उठे हैं।लोकसभा के दृष्टिकोण से पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश से 80 सांसद आते है।यदि 2022 के विधान सभा में पार्टी दुबारा जीत हासिल करती है तब मिशन 2024 के लिए उनका रास्ता कुछ आसान हो जायेगा। इसी उद्देश्य से पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश पर फोकस करते हुए रणनीति बनाने जुट गई है। अब यह देखना होगा की कोरोना काल के दौरान जो पार्टी की छवि धूमिल हुई है, पार्टी के प्रति जो लोगों की नाराजगी बढ़ी है। कैसे पार्टी डैमेज कंट्रोल करती है।




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