Tuesday, May 18, 2021

लॉकडाउन की पाबंदियों से प्रवासी मजदूरों की बढ़ी परेशानी।

दोस्तों नमस्कार 
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के दौरान  मैं आप सबों से और निवेदन करता हूं कि आप अनावश्यक भीड़ भाड़ में जाने से बचें। मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करें। स्वस्थ रहें मस्त रहें।

झारखंड में स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के दौरान 16 मई से 27 मई 2021 तक आवागमन पर सख्त पाबंदियां और e-pass को अनिवार्य करने के बाद दूसरे राज्यों से आ रहे प्रवासी मजदूरों के लिए परेशानियां बढ़ गई हैं। 
ट्रेन से झारखंड पहुंचने के बाद उन्हें अपने घर तक जाने के लिए गाड़ियां नहीं मिल रही है। भारी भरकम सामान और बच्चों के साथ वे इस उमस भरी गर्मी में पैदल चलने को मजबूर हैं। कहीं गाड़ियां मिल भी गयी तो मनमाना भाड़ा वसूला जा रहा है। अपने राज्य लौट रहे प्रवासी मजदूर सरकार से काफी खफा हैं। उनका कहना है कि झारखंड सरकार फेल है। बाहर से लौट रहे लोगों के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
पंजाब हरियाणा दिल्ली गुजरात महाराष्ट्र  आदि जगहों से लौट रहे प्रवासियों को 20 किलोमीटर के लिए ऑटो का दो- दो सौ रुपये किराया चुकाना पड़ा। वह भी ऑटो वाले ने जांच में पकड़े जाने के डर से आधे रास्ते में ही उन्हें उतार दिया। प्रवासी मजदूरों की त्रासदी लॉकडाउन वन की याद दिला रही है। अपने घर लौटे प्रवासी मजदूरों के समक्ष रोजगार का भी संकट है।सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों को।मनरेगा के तहत रोजगार देने की बात कही गई थी लेकिन हकीकत कुछ और बयान कर रही है।

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