Monday, May 31, 2021

बिहार में 25.9 फीसदी लोग करते है, तंबाकू का सेवन।

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2014 से बिहार में तंबाकू बैन फिर भी 25.9 फीसदी लोग तंबाकू का सेवन कर रहे है। यह जानकारी स्वयं बिहार के उपमुखुमंत्री द्वारा दिया गयाा

जिस प्रकार राज्य में शराब बंदी है लेकिन राज्य में धडल्ले से शराब की बिक्री जारी है।उसी प्रकार 2014 से राज्य में तम्बाकू बैन होने बावजूद सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25.9 फीसदी लोग तंबाकू का सेवन कर रहे है। सरकार द्वारा हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर खानापूर्ति कर दी जाती है। तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में राज्य सरकार को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही संस्था सोशियो इकोनोमिक एंड एजुकेशनल सोसाइटी (सीड्स) लंबे समय से बिहार में खैनी पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा है। सीड्स ने राज्य सरकार से खैनी को खाद्य सामग्री की श्रेणी में लाने और फिर इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट-2006 के तहत प्रतिबंधित करने की मांग की थी। सीड्स के मुताबिक इसी एक्ट के तहत राज्य में गुटखा एवं पान मसाले को प्रतिबंधित किया गया है। बिहार में 23.5 फीसदी चबाने वाले तंबाकू का सेवन करते हैं, जिसमें लगभग 20.5 फीसद युवा खैनी खाते हैं।तंबाकू बिहार में कैंसर का एक बड़ा कारण है। राज्य में प्रतिवर्ष 80 हजार लोग कैंसर से पीड़ित होकर अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग 75 से 80 प्रतिशत मरीज मुंह, गले, स्वर ग्रंथी और खाने की नली के कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है मरीजों द्वारा लंबे समय तक गुटखा, खैनी आदि जैसे तंबाकू पदार्थ का सेवन किया जाना। 
पूरे देश में 12 लाख नए लोग कैंसर से ग्रसित होते हैं। इनमें से लगभग तीन लाख लोग तंबाकू सेवन के कारण कैंसर पीड़ित होते हैं। 




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