सरकार का यह फैसला किसी के भी समझ से परे : भाजाप
सरकार की प्रमुख घटक झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्पष्ट तौर पर कहना है कि यहां के लोग, मूलवासी, जनजातीय लोगों को उचित प्रतिनिधित्व यहां के नौकरियों में मिलना चाहिए. पूर्ववर्ती की सरकारों ने इनके साथ ना’इंसाफी की है. सरकार ने बांटने का काम किया है. दूसरी ओर सरकार के इस फैसले पर बीजेपी ने अपनी प्रतक्रिया में कहा है कि सरकार का ये फैसला समझ से परे है. भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि भोजपुरी, मैथिली, अंगिका और मगही बोलने वाले लोग भी झारखण्ड में रहते हैं. झारखण्ड के विकास में अपना अहम योगदान हैं. वैसी स्थिति में इस तरह का भे’दभा’व करना अनुचित है. पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी. जानकारी हो कि जेटेट से कई ऐसी भाषाओं को बाहर कर दिया गया है जिसे बोलने, लिखने पढ़ने वालों की बड़ी संख्या राज्य में है. राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में ऐसे लोग अरसे से निवास करते आ रहे हैं. ऐसे में जेटेट में मैथिली, अंगिका, भोजपुरी, मगही को बाहर किये जाने से भारी नाराजगी है.
सरकार का यह फैसला गैरवाजिब व अवैध : सरयू राय
जमशेदपुर पूर्वी से विधायक व पूर्व मंत्री सरयू राय ने भी सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. सोशल मीडिया पर उन्होंने इस मसले पर अपनी बात रखी है. सरकार के इस फैसले को वे कानूनी रूप से भी सही नहीं मान रहे. सरयू राय के मुताबिक मैथिली, अंगिका, भोजपुरी जैसी भाषाएं झारखंड के बड़े क्षेत्र के निवासियों की मातृभाषा है. ऐसे में जेटेट से इन भाषाओं को बाहर रखना अवैध है. विधि विभाग इस संबंध में सराकर के शिक्षा विभाग को सही परामर्श दे. इससे बड़े भू-भाग में रहने वाले लोगों और उनकी भाषाओं के साथ अन्याय नहीं होगा. साथ ही अनावश्यक मुकदमेबाजी से भी बचा जा सकेगा।
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