पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी पत्र में लिखा है कि प्राय ऐसा देखा जाता है कि आम नागरिकों द्वारा कॉम्बेट ड्रेस का प्रयोग किया जाता है जिसे विभिन्न सुरक्षा बलों द्वारा धारण किया जाता है। उल्लेखनीय है कि झारखंड में कई बार सक्रिय उग्रवादियों द्वारा भी कॉम्बेट ड्रेस का प्रयोग किया जाता है। आम नागरिकों द्वारा कॉम्बेट ड्रेस धारण किये जाने से सुरक्षा बलों द्वारा उग्रवादियों के विरुद्ध चलाये जाने वाले अभियान के दौरान भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसा नहीं हो ये सुनिश्चित करना होगा।
पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक के नाम जारी निर्देश में कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में आम नागरिकों द्वारा कॉम्बेट ड्रेस का प्रयोग ना हो ये सुनिश्चित करें। यदि कोई कॉम्बेट ड्रेस पहने हुए पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई करें और पुलिस मुख्यालय को इस बाबत सूचित करें। ये बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि आम नागरिकों द्वारा कॉम्बेट ड्रेस धारण करने और इससे उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों के बारे में पहला मामला तब प्रकाश में आया था जब उरी में आतंकियों ने हमला किया था। हमले में शामिल सभी आतंकी सेना की वर्दी में थे। उनको पहचाना नहीं जा सका और वे आसानी से कैंप के भीतर घुस आये थे। उस समय भी दुकानों में खुलेआम बिकते कॉम्बेट ड्रेस के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। दुकानदारों को कॉम्बेट ड्रेस बेचने से मना किया गया था।
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