Friday, October 8, 2021

सरना धर्म कोड को मान्यता दिए जाने की मांग को लेकर डीसी कार्यालय पर धरना, डीसी के माध्यम से रष्ट्रपति को मांगपत्र


वर्ष 2021 की जनगणना में सरना धर्म कोड को मान्यता दिए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को आदिवासी समाज के लोगों ने डीसी कार्यालय के सामने धरना दिया और मांग की है कि जनगणना में धर्म के स्थान पर उनका धर्म सरना लिखा जाय. इस सम्बंध में डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया. धरना पर बैठे वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति की पूजा करने वाले 15 करोड़ आदिवासी इस देश रहते हैं. ये हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म से ताल्लुक नहीं रखते हैं. प्रकृति की पूजा करने वाले आदिवासी सरना धर्म को मानते हैं. भारतीय संविधान में अभी तक सरना धर्म को शामिल नहीं किया गया है. वक्ताओं का कहना था कि सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग को लेकर आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के नेतृत्व में पिछले दो दशक से आंदोलन किया जा रहा है।
लेकिन इस दिशा में अभी तक सरकार की ओर से किसी तरह की पहल नहीं की गई है. आदिवासी सेंगल अभियान के केंद्रीय संयोजक बिमो मुर्मू ने राष्ट्रपति से इस दिशा में पहल करने की मांग की है. आदिवासी सेंगल अभियान के संयोजक ने राष्ट्रपति के समक्ष मांग रखी है कि संताली को हिंदी के साथ झारखंड की राजभाषा बनाने, हो, मुंडा, कुड़ूख और खड़िया भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने, झारखंडी डोमिसाइल और अन्य संवैद्धानिक कानूनी अधिकारों की रक्षा करने, सीएनटी/एसपीटी एक्ट की रक्षा करते हुए वीर शहीद सिदो मुर्मू और बिरसा मुंडा के वंशजों को सम्मान देने, सुरक्षा और समृद्धि के लिए दो ट्रस्टों का गठन करने, असम, अंडमान आदि के झारखंडी आदिवासियों को अविलंब अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने, विस्थापन और पलायन पर रोक लगाने, शहीद सिदो मुर्मू के वंशज रामेश्वर मुर्मू और रूपा तिर्की की संदिग्ध मौतों की सीबीआई जांच कराने संबंधी मांगें शामिल हैं. धरना में आदिवासी सेंगेल अभियान के केंद्रीय महासचिव डॉ सोमाय सोरेन, जिला अध्यक्ष सीताराम माझी, सेंगेल परगना जूनियर मुर्मू आदि शामिल थे।

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