Tuesday, October 5, 2021

75 वर्षो के इतिहास में पहली बार सरायकेला सरकारी पूजा कमेटी को नहीं मिला सरकारी फंड, लोगों में नाराजगी, अपने स्तर से प्रबंध कर पूजा आयोजित कर रही कमेटी


आजादी के बाद से 75 वर्षो के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि सरायकेला सरकारी पूजा कमिटी को सरकार की ओर से पूजा के लिए फंड नहीं मिला. संयुक्त बिहार के समय बिहार सरकार यह राशि मुहैया कराती थी. बिहार विभाजन के बाद झारखंड सरकार द्वारा पूजा के नाम पर फंड दिया जाता था. 7 सदस्यीय कमेटी अपने स्तर से प्रबंध कर पूजा का आयोजन कर रही है. क्योंकि पूजा कमिटी ना तो किसी से चंदा लेती है और ना ही मांगने की परंपरा है. सरकारी फंड से ही यहां पूजा का आयोजन होता रहा है. इसको लेकर कमेटी व क्षेत्र के लोगों में खासी नराजगी है. फिर भी लोगों को यह भरोसा है कि लेट सवेर उन्हें सरकारी राशि मिल जायेगी. सरायकेला सरकारी पूजा कमेटी का इतिहास बड़ा ही रोचक रहा है. आजादी के समय देश के लगभग सभी राजवाड़ों करीब 660 रियासतों को अंग्रेजों ने स्वतंत्र कर दिया था. लेकिन तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इन रियासतों का भारत संघ में विलय किया. विलय को लेकर रियासतों की अपनी अलग-अलग शर्ते थी. इसी शर्त के अनुसार सरायकेला राजवाड़े को पूजा (दुर्गा पूजा, लख्खी पूजा समेत आधा दर्जन पूजा) के लिए प्रत्येक वर्ष सरकारी फंड से राशि का आवंटन किया जाता है. जिसका बातौर लिखित एग्रीमेंट है. पिछले कुछ वर्षों से पूजा के लिये 500000 रुपए मिला करते हैं. सभी छह पूजाओं पर यह राशि खर्च की जाती है. वर्ष 2020 में भी पूजा कमेटी को यह राशि मिली थी.
लेकिन इस बार सरकारी की ओर से कोई राशि नहीं दी गयी. 75 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. कमेटी के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 1948 में यह रकम बहुत छोटी हुआ करती थी. लेकिन धीरे-धीरे बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखकर सरकार ने इसे पिछले वर्ष तक ₹500000 दिए थे. इस कमेटी की खासियत है कि सरायकेला खरसावां के डीसी कमेटी के अध्यक्ष होते हैं. एसडीओ जनरल सेक्रेटरी होते हैं. प्रत्येक वर्ष कलश स्थापन एसडीओ द्वारा ही किया जाता है. एक बार ऐसा भी हुआ कि एसडीओ के पद पर एक मुस्लिम तबरेज कयूम जम्मु काश्मीर के थे. पूजा उन्हीं को करनी थी और कलश स्थापन भी उन्हीं को करना था. लेकिन तबरेज ने इससे बिलकूल ही परहेज नहीं किया. उन्होंने पूजा के लिये व्रत रखा, भले ही कलश का उन्होंने स्पर्श नहीं किया, लेकिन पास में ही बैठे. इस बार कलश स्थापन सरायकेला खरसावां के एसडीओ कृष्ण कुमार करेंगे. यह भी जानकारी हो कि सरायकेला और खरसावां दोनों जगहों पर दुर्गा पूजा के साथ-साथ लक्ष्मी पूजा, काली पूजा, जगाधत्री पूजा समेत इस सीरीज की सभी पूजायें हुआ करती हैं.

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