विधायक सरयू राय ने डीजीपी से केबुल परिसंपत्तियों की चोरी की जांच बड़े एजेंसी से करवाने की मांग करते हुए कहा कि पूर्व में भी केबुल वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इंकैब की परिसम्पतियों की चोरी की जांच कराने और दोषी पर कार्रवाई करने के बारे में गोलमुरी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी लेकिन पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने बजाय 14 अक्टूबर 2020 को महज सनहा दर्ज कर खानापूर्ति कर दी।सरयू राय ने पत्र के माध्यम से कहा कि केबुल कम्पनी पर फिलहाल लिक्विडेशन का संकट है इसके पुनरूद्धार का प्रयास जारी है।एनसीएलटी द्वारा नियुक्त रिजोल्युशन प्रोफेशनल ने इस हेतु ईओआई प्रकाशित किया है।जिसमें वेदान्ता और टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट्स जैसी बड़ी कम्पनियों ने इंकैब के पुनरूद्धार में रूचि दिखाया है।
उन्होंने कहा एक ओर इंकैब के पुनरूद्धार और पुनरूद्धार नहीं हो पाने की स्थिति में इसके लिक्विडेशन की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान इंकैब फैक्ट्री के प्लांट से कल-पुर्जों की चोरी होना चिंता का विषय बना हुआ है और तो और इसकी सूचना मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होना और भी चिंता का विषय है।
उन्होंने डीजीपी को जिस बेनामी पत्र की प्रतिलिपि और फोटो भेजी है।उसमें सपष्ट है कि पुलिस की संलिप्तता किस सीमा तक इस मामले से जुड़ी है। इसमें न केवल स्थानीय पुलिस-प्रशासन बल्कि स्थानीय प्रभावशाली राजनेताओं और शहर के सफेदपोशों की मिलीभगत है।उन्होंने बताया कि यह कारनामा केवल कम्पनी एक्ट के आधार पर एनसीएलटी और एनसीएलएटी के दायरे तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है।
उन्होंने कहा अतः इसकी जांच किसी सक्षम जांच ऐजेंसी से कराई जानी चाहिए।उन्होंने बताया कि केबुल कम्पनी की परिसम्पतियां राज्य की और कम्पनी के शेयरधारकों की परिसम्पतियां है। इनके साथ केबुल कर्मियों का भविष्य जुड़ा हुआ है।उन्होंने डीजीपी से इस दिशा में उचित कार्रवाई की मांग की है।
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