सिंह शिवगीत ने हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा को एक शिकायती खुला पत्र लिखा है। अपने फेसबुक पेज पर लिखे पत्र में उन्होंने अपनी तरकस में भरे शब्दों के तीर जमकर छोड़े है। शब्दों की जाल से भाव को निकालकर देखे तो सांसद की सोच और कार्य प्रणाली पर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए गए है। "खत का मजमून भांप लेते हैं लिफाफा देख कर"!! यह कहावत इस खत में चरितार्थ हो रहा है। खत का मजमून सांसद प्रतिनिधि प्रोफेसर सुरेन्द्र सिन्हा को विभावि के नव नियुक्त सिंडिकेट सदस्य बनाए जाने से जुड़ा है। प्रेम, वीर और राजनीतिक रस से सराबोर इस खत की हर पंक्तियों के शब्दों के अर्थ को निकाल कर देखने से उसका भाव स्पष्ट हो जाता है। पत्र में शब्दों के बाण की रफ्तार इतनी तेज है कि इससे बचना और संभलना सांसद के लिए बड़ी मुश्किल है। पत्र में उन्होंने शब्दों की टोकरी में फूलों गुच्छों से जहां खुशबू बिखेरने का प्रयास किया है वहीं उन्होंने शब्दों की कटारी से सांसद की सोच पर जबरदस्त वार भी किया है। अपने आप को सिद्धांतवादी और राम का आदमी बताकर बिन पूछे यह भी सवाल उठा दिया है कि वह भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं के साथ खड़े नहीं दिखते है। हजारीबाग की जमीन और यहां की खुशबू से सांसद का दिली रिश्ता और वास्ता पर भी उन्होंने निशाना साधा है।
प्रोफेसर सुबोध सिंह शिवगीत का पूरा पत्र पढ़कर आप भी उसका भावार्थ निकालिए ...
आदरणीय,
सांसद महोदय,हजारीबाग झारखंड(पढ़ें..समझें..खुद से ,और हो सके तो ससमय कुछ करें ...क्षेत्र के समर्पित बुद्धिजीवियों के लिये)
सादर प्रणाम,
संदर्भःवि.भा.वि. के नव नियुक्त.सिंडिकेट सदस्य (गवर्नर नामित )
माननीय,सम्माननीय, महाशय,
विदित हो आप एक राष्ट्रवादी,रामवादी,मर्यादावादी दल के लगभग चार लाख के अंतर से जीतने वाले संपूर्ण हजारीबाग के सांसद हैं.लाखों लोगों की आस्था और कई दसकों की कठिन साधना का यह सुफल है., हर जाति वर्ग और पेशे से जुड़े लोगों ने हजारीबाग भा.ज.पा.की नींव में अपना तन,मन धन और महावीर लाल विश्वककर्मा ,प्रो.के.पी.शर्मा,प्रो यदुनाथ पांडेय (तीनों शिक्षक )ने तो संपूर्ण जीवन ही लगा कर इस दल को सींचा और बढ़ाया है .जो आज ..*घर वाला बर तर..और बर वाला घर तर...*की मारक नीति के शिकार हो संन्यासी जीवन हेतु विवश हैं..रहा न कोऊ रोवन हारा...चूँकि उन्होंने अपने वंश बेल की बजाय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया..बेटों को नहीं....पोतों को नहीं....
खैर आप बहुत बड़े परिवार के आदमी हैं,पैतृक संपत्ति के रूप में आपको विरासत में हजारीबाग मिला(हालांकि अब वह विरासत झारखंड से ममता दीदी के बंगाल तक विस्तारित होचुका है,बिहार तोअपना खतियानी है ही ). हम दल के ,सिद्धांत के और राम के आदमी हैं .संपूर्ण हजारीबाग,रामगढ़.और चतरा कोडरमा ने भी आपका साथ दिया जाति नहीं जमात और जानकी नाथ ...के चलते...एक बार नहीं दो बार..जबकि आप विदेशी विश्व विद्यालयों के पढ़े लिखे कोरोना काल के बहुत बहुत पहले से हाथ में बार बार* सेनेटायजर *लगाने वाले मखमलों में पले बढ़े अकूत धन संपदा के मालिक पर हजारीबाग के भूगोल से अनजान थे .यहां पिता का प्रबंधन और पार्टी की निष्ठा, जनता का कमल प्रेम ...कैश हो गया..हालांकि यह सिंबल *काशी काका*के.पी .बाबा,सांवर दादा,बादल चाचा, काली भैया, आदित नूनू,कैलाशपतिओझा,हरि ओझा,, राज कुमा लाल ,विनोद झुन झुनझुन,कृष्णा सिन्हा,सुनील सिन्हा,दीना गोप,अशोक यादव,सुमन पप्पू,अनिल मिश्रा,दामोदर सिंह, भैया अभिमन्यू विजय वर्मा,दिनेश कुशवाहा
श्रद्धानंद,विवेकानंद,केसरी,टोनी जैन, बांके बिहारी...कांके ..सांके बिहारी -बंगाली- पंजाबी ,उडिया.गुड़िया..किसी को मिलता तो भी वही होता जो होता आ रहा है.पर किसी के पास आपके जैसा* पा पा *सिर्फ और सिर्फ पा..पा..नहीं था..पैसा जाति और जमात तो बहुतों के पास था। है। और रहेगा..।।
उच्च शिक्षा से जुड़े सैकड़ो लोगों ने*संघ और भाजपा *के साथ जुड कर जनता के साथ जमीन पर काम किया है,और आगे भी करते रहेंगे चूँकि आपके जिम्मे अभी मैच का पीच और मैदान है ,,,हमारा मन ..तन.. और* त्वदीयाय कार्याय बद्धाकटीयम् *का संकल्प और समर्पण तो जनम जनम तक सीतापति राम और राष्ट्र के साथ है .रहेगा. गिलास का पानी गंदा हो सकता है गंगाजल नहीं।
अभी राज्य में गैर भाजपा.सरकार है .दो वर्षो के छोटे अंतराल में हजारीबाग बड़कागांव के, पर वैज्ञानिक डा. मुकुल नारायण देव सर को विभावि. का कुलपति बनाया गया,हजारीबाग के धरती पुत्रों को मिलनेवाला यह पहला अवसर था. ..दूसरा अवसर मिला संत कोलंबा महाविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष डा.जमाल अहमद को .जे.पी.एस.सी. के माननीय सदस्य के रूप में. न कोई एम.एल.ए.और न एम.पी. बुद्धिजीवी प्रसन्न हैं।।।..और एक बड़ा वर्ग उहा पोह में है कि भाजपा. खाश कर जयंत बाबू हमें जरखरीद गुलामसमझतेहैं.ये हमें **खून देने वाला मजनू **समझ बैठे हैं. जन -मजूर.और कमल केलिये कादो बनाने वाला हर जोतवा किसान समझते हैं-कूली भाट मानते हैं
" वन का गीदर जायेगा किधर"
दूध पीने वाले मजनू इनके अपने घर में हैं...खून देने वाले पूरे संसदीयक्षेत्र के गाँव गाँव और शहर में हैं.।
माननीय जयंत जी ,कई शिक्षाविदों ने हमें फोन कर आपसे निकट मित्रता का हवाला देकर कहा--"कि बिगाड के डर से ईमान की बात नहीं कहोगे सुबोध" तब जाकर यह पत्र लिख रहा हूँ चूँकि मैं अशोक वाटिका जाता नहीं,आप फोन या वाट्सप खुद उठाते नहीं..सर,. माननीय सांसद जयंत सिन्हा के सांसद प्रतिनिधि डा.प्रो.वाणिज्य के विद्वान श्री सुरेन्द्र सिन्हा को विनोबा भावे वि.वि. का सिंडिकेट सदस्य बनाया जाना हम सबों केलिये हर्ष का विषय है..उनसे हमारे परिवार का सबंध आपसे बहुत पुराना है..बल्कि जब आपका परिवार यहां चन्द्रशेखर जी द्वार भेजा गया था उस पहले चुनाव के भी पहले से।।।। उनके प्रोफेसर होने के कागज पर शायद अभी भी शिव दयाल सिंह ,प्राचार्य मार्खम कालेज लिखा है जो रिश्ते का गवाह है.लोगों के पास एक तो उनके पास कलर्क से प्रोफेसर तक बनने का दो दो पत्र है।70ई.से उनका अनुजवत हूँ,दांत काटी रोटी का अपना नाता है जो सदैव रहेगा भी
सर ! सवाल इसके पीछे, और पीछे के भी हैं --आपने सांसद प्रतिनिधि के रौब और पावर को सिंडिकेट सदस्य बनाकर कम कर दिया है..बनाना था तो धनबाद का भी.सी.बनाते..बहुत सारे पद हैं जो अभी रिक्त हैं..सिंडिकेट सदस्य के रूप में तो वे अनंत बार मौन मैनेजमेंट सेवा दे चुके हैं..
सर लोगों का प्रश्न है कि इसके पहले आप सब का आशीर्वाद भूगोल के स्व.प्रो. अभय सिन्हा को,कभी बेंशी सिन्हा को,कभी सी.पी.सिन्हा को तो कभी श्रीवास्व सिन्हा को मिलता रहा है,नाम रूप बदलकर, मेरिट लिस्ट बनाकर .हालांकि उनमें से कोई भी आपने मेरिट अपने टैलेंट के सामने आपके परिवार को यश देने को तैयार नहीं है..जबकि इन नियुक्तियों के लिये कभी भी लिखित या मौखिक परीक्षा नही होती ..पैरवी ही का पावर होता है..
सर! मठ के महंथ आप हैं,उच्च शिक्षा से जुड़े क्षेत्र के समर्पित कार्य कर्ताओं का भी कुछ हक, कुछ सम्मान बनता हैं,।।।ठीक है दीपक पहले घर में जलता है..पर मंदिर की आस्था हेतु कभी एकाध दीपक मंदिर में भी जला दिया करें.हलाला का विरोध करने वाली पार्टी का प्रतिनिधि खुद हलाला और हलाल होते देखे, यह शोभा और स्वास्थ्य दोनो दृष्टिकोण से गलत है ।
मैं वचन देता हूँ,मुझे आपका सिर्फ और सिर्फ मान सम्मान चिहिए.पर सेवाधारी बुद्धिजीवी यों की एक लंबी कतार है..... अपने दरबारियों से सलाह कर कभी उनके साथ भी खडा होने की कृपा करें.....हालांकि विश्वास है आपके पारिवारिक व्याख्याताकार ....इस पत्र के बाद हमारे आपके बीच ऐसी खाई -खंदक बना.देंगे कि आप होली ,-दशहरा की भी शुभकामनाएं देने में हमें काट कर आगे बढ़ जायेंगे..
वैसे सब का साथ..सब का विकास..सब का विश्वास...और सब का प्रयास...मोदी जी कहते हैं...हम सब हजारीबाग के बुद्धिजीवी इसे ध्येय वाक्य मानते हैं ...दिन रात सिद्धांत के लिये कार्यरत रहते हैं...समाज के पास आप की तरक्की के लिये भीख और भोट दोनो मांगने हर रोज जाते रहते हैं ।कोरोना काल में भी जब आप नही थे ...तब भी हम भीख मांगने.की कतार मे थे...हम सब ने भीख मांगा हैं.आप व्यस्त और बडे लोग भी कभी हमारा दूर से सही पर खयाल तो रखें..।समभाव का पालन करते तो भारत माता बलवती और शक्तिवान होती..
हिन्दुवः सोदरा सर्वे,न हिंदू पतितो भवेत
मम दीक्षा हिंदू रक्षा, मम मंत्र समानता। हमारा ध्येय है..और रहेगा
पत्र का भाव लें आशय को स्वयं से समझें .बिचौलिये अर्थ का अनर्थ बना देंगे।भाषा और लेखन में गलती हुई हो तो माफ करेंगे। कोई अपनापन का हक रखने वाला ही सलाह देता है..सलाह माने तो राम राज्य नहीं माने तो कृष्ण राज्य..जय हिंद! जय श्री राम!
सुबोध सिंह शिवगीत,कदमा,हजारीबाग
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