Thursday, September 16, 2021

झारखंड सरकार को नीति आयोग से `न्याय` की आस, केंद्र पर सौतेलेपन के आरोप के बाद सियासत तेज


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नीति आयोग की टीम के साथ बैठक हुई. जिसमें डीवीसी, जीएसटी, कोल कंपनियों पर बकाया, कुपोषण, सिंचाई एवं जलापूर्ति, सड़कों, आदि मुद्दों के समाधान को लेकर बात हुई, हालांकि इस दौरान झारखंड सरकार ने राज्य के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार का मामला भी उठाया, जिसे लेकर अब राज्य में सियासत तेज हो गयी है।नीति आयोग की टीम के साथ करीब 3 घंटे तक चली बैठक में 20 से 22 विषयों पर चर्चा हुई. बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि 'नीति आयोग के साथ बैठक में झारखंड के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार से जुड़े मुद्दों को उठाया। डीवीसी, जीएसटी, कोल कंपनियों पर बकाया, एससीए, कुपोषण, सिंचाई एवं जलापूर्ति, सड़कों, आदि मुद्दों के समाधान हेतु चर्चा हुई. शुरुआत अच्छी हुई, आशा है निष्कर्ष बेहतर होगा। संघीय ढाँचा सशक्त होगा।
नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार का मुद्दा उठाए जाने पर सियासत भड़क उठी. बीजेपी ने इसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा की राज्य सरकार सिर्फ जनता को दिग्भ्रमित कर रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को खुश होना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने योजना परिषद बंद कर नीति आयोग बनाने का काम किया, ताकि दिल्ली राज्यों के पास जाए, और उन राज्यों के आर्थिक और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखकर बेहतर काम किया जा सके।
वहीं झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के मुताबिक राज्य सरकार को अपनी असफलता का ठीकरा केंद्र सरकार पर नहीं फोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा की कांग्रेस ने 70 साल तक इस देश के अंदर शासन किया, और उनके कार्यकाल में कितने पैसे राज्य में आए, यह सब जानते हैं. दीपक प्रकाश के मुताबिक चूंकी झारखंड सरकार सभी मोर्चों पर विफल हो चुकी है, इसलिए विफलता का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ना चाहती है।
वहीं सत्ता पक्ष के मुताबिक केंद्र और राज्य का संबंध, राजनीति से ऊपर होता है, लेकिन पिछले डेढ़ सालों में केंद्र के सौतेले व्यवहार के कारण राज्य को उसके हक और अधिकार से वंचित किया गया।
जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे के मुताबिक पिछले डेढ़ सालों से राज्य ने केंद्र के सौतेले व्यवहार को झेला है, जिसके कारण राज्य को उसके हक और अधिकार से वंचित रखा गया. नीति आयोग के साथ बैठक में इन सभी मुद्दों पर विस्तार और सकारात्मक चर्चा हुई, नीति आयोग हमारे मुद्दों से सहमत है, और अब हमें उम्मीद है की संघीय ढांचे के मुताबिक ही केंद्र व्यवहार करेगा।
वहीं झारखंड सरकार के मंत्री आलमगीर आलम ने कहा की केंद्र सरकार 'पिक एंड चूस' के तहत काम कर रही है, क्योंकि दूसरे राज्यों में पैसा बकाया है, तो उनके पैसे नहीं काटे जा रहे हैं, जबकि झारखंड के पैसे काट लिए जा रहे हैं. आलमगीर आलम के मुताबिक झारखंड का करोड़ों रुपए केंद्र सरकार के पास बकाया है, लेकिन उसे नहीं लौटाया जाता है, और हमारा बकाया काट लिया जाता है, जो सही परंपरा नहीं है।
वहीं झारखंड सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा की जब झारखंड में हेमंत सरकार सत्ता में आई, तो बिना किसी जानकारी के राज्य के खाते से पैसे काट लिए गए, यह कहीं से उचित नहीं है, इसके बावजूद नीति आयोग के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने तमाम विषयों पर चर्चा की है और उम्मीद जतायी है कि परिणाम सकारात्मक होंगे.


बता दें की नीति आयोग की टीम के साथ बैठक में डीवीसी के बकाये राशि काटने का मुद्दा रखा गया, तो वहीं GST के बकाये भुगतान की भी मांग की गयी. सभी मांगों को लेकर नीति आयोग की तरफ से संबंधित मंत्रालयों के साथ बात कराने का भरोसा दिलाया गया है।

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