Thursday, September 16, 2021

राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद के आदेश पर झारखंड की जेलों से 90 कैदी हुए रिहा


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में पिछले एक माह में कई चरणों में चली राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में आजीवन कारावास के 90 कैदियों को छोड़ने पर सहमति बनी है। इनमें रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के 53 कैदी, लोकनायक जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा हजारीबाग के 11 कैदी, केंद्रीय कारा दुमका के 17, केंद्रीय कारा घाघीडीह जमशेदपुर के छह और केंद्रीय कारा मेदिनीनगर पलामू के तीन कैदी शामिल हैं। राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में राज्य की जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 185 कैदियों की सूची पर विचार किया गया।

इस सूची में कुख्यात अपराधी अनिल शर्मा व सुरेंद्र बंगाली का नाम भी था, जिनका पत्ता कट गया। उनकी कारा मुक्ति पर पर्षद की सहमति नहीं मिली। राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद के फैसले के बाद  रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से 20 बंदियों को छोड़ा गया। जो ज्यादा बुजुर्ग थे, उन्हें  उनके परिजन के साथ घर भेजा जाएगा। ऐसे शेष बंदियों की संख्या 33 है। राज्य के अन्य केंद्रीय कारा से भी बंदियों को छोड़ा जाना जारी है।राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुख्यात अपराधी अनिल शर्मा और सुरेंद्र बंगाली उर्फ सुरेंद्र सिंह रौतेला का नाम भी असमय कारा मुक्ति की सूची में रखा गया था। बैठक में एसपी, जेल प्रशासन व प्रोबेशन पदाधिकारी की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। अनिल शर्मा रांची के मेन रोड स्थित हिंदपीढ़ी थाना क्षेत्र के मेट्रो फर्नीचर निवासी हैं। उनके बारे में रिपोर्ट दी गई कि उन्होंने जेल में ही एक अन्य अपराधी की हत्या कर दी थी। इसी तरह सुरेंद्र बंगाली के बारे में भी रिपोर्ट दी गई कि कैसे उन्होंने महेश पांडेय व उनके भाई की हत्या कर दी थी। रंगदारी व हत्या इन अपराधियों की फितरत रही है। यही वजह है कि इन दोनों अपराधियों की असमय कारामुक्ति पर विचार नहीं किया जा सकता है। सभी रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ही बोर्ड ने उन्हें असमय कारा मुक्ति के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

No comments:

Post a Comment