Thursday, August 5, 2021

आठ महीने से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाने के बावजूद गजेंद्र सिंह को नहीं मिला एनओसी ,अब मांग रहे है इच्छा मृत्यु।


झारखंड सरकार की लचर व्यवस्था के कारण मानगो सुभाष कॉलोनी के रहने वाले गम्भीर बीमारी की स्थिति में बेसहारा बने गजेंद्र सिंह इच्छा मृत्यु मांगी है. गजेंद्र सिंह की दोनों किडनी खराब है. CMC वेल्लोर के चिकित्सकों ने गजेंद्र सिंह को किडनी जल्द से जल्द स्थानांतरण करने को कहा है. गजेंद्र सिंह की पत्नी दुर्गा सिंह अपना किडनी देने के लिए तैयार हो गई. अस्पताल प्रबंधक ने राज्य सरकार से NOC लाने को कहा. अस्पताल प्रबंधक ने स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर के नाम एक पत्र भी लिखा. गजेंद्र सिंह को लगा की एनओसी लेना बहुत आसान काम है. क्योंकि किडनी उनकी पत्नी को देना है. लेकिन एनओसी का मामला इतना अधिक पेचीदा हो गया कि गजेंद्र सिंह अब इच्छामृत्यु मांग रहे है. आठ महीने से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाने के बावजूद भी गजेंद्र सिंह को आज तक एनओसी नहीं मिला. गजेंद्र सिंह का बेटा मोहित उर्फ प्रिंस UPSC का PT पास कर मुख्य परीक्षा की तैयारी पंजाब और दिल्ली में कर रहे थे. पिता जी की तबियत खराब की सूचना पर बेटे मोहित NOC के लिए जमशेदपुर वापस आ गया. आठ महीने से एनओसी के लिए दर-दर भटक रहा है. जिसके कारण यूपीएससी का पीटी पास करने के बावजूद भी वह मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया.
थक हार कर आज गजेंद्र सिंह ने प्रेस मीडिया के सामने इच्छा मृत्यु की बात कही. गजेंद्र सिंह ने भाजपा नेता विकास सिंह को बताया अस्पताल ने 8.50 लाख रुपए का प्रबंध करने को कहा. गजेंद्र सिंह की पत्नी ने सारे जेवरात बेचकर और गांव की जमीन बंधक रखकर रु 8.50 लाख की व्यवस्था कर लिया था. परिवार वालों को भरोसा था कि राज्य सरकार द्वारा जल्द ही एनओसी मिलेगा और यह जाकर वेल्लोर में अपना किडनी स्थानांतरण करवाकर स्वस्थ हो जाएंगे. लेकिन आठ महीना तक जब एनओसी नहीं मिला. हर दूसरे दिन डायलिसिस करवाने के कारण इनके पास रखा हुआ रु 8.50 लाख धीरे-धीरे करके समाप्त हो गए. उनके आवास पर पहुंचे भाजपा नेता ने उन्हें हिम्मत दिलाई कहा कि जल्द आपको एनओसी दिलवाने का कार्य किया जाएगा. साथ ही प्रधानमंत्री महोदय एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र और ट्विटर के माध्यम से आपके साथ हो रहे अन्याय से अवगत कराया जाएगा ताकि एनओसी का मामला फास्टट्रैक में लाया जाए जिससे किसी का जीवन बच सके.

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