श्री मुखे ने कहा है कि सोनारी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान के चुनाव को लेकर तरह तरह की चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि सोनारी गुरुद्वारा साहिब के प्रधान का चुनाव होना था. गुरुद्वारा साहिब में केवल चुनाव के समय ही हल्ला हंगामा करना उचित नहीं. सिक्खों को हमेशा गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने जाना चाहिए और संगत समागम में शामिल होकर गुरु घर से जुड़े रहें. गुरु घर में यह सोचकर नहीं जाना कि वहां के मुखी सेवादार मेरे विरोधी गुट के हैं. इसलिए मैं नहीं जाउंगा. गुरुद्वारा का चुनाव गुरुद्वारा परिसर में ही होना है ना की किसी व्यक्ति विशेष के प्रतिष्ठान में. यह सोच तुच्छ मानसिकता को दर्शाता है. क्योंकि गुरुद्वारा साहिब संगत का है और संगत सर्वोपरी है. सैंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सोनारी गुरुद्वारा साहिब के प्रधान को नहीं चुना. मीरी पीरी दिवस समागम में शामिल संगत ने सर्वसम्मति से अगले 3 वर्षों के प्रधान तारा सिंह जी को चुना. संगत के बीच से ही परवानगी दी गई.
गुरमुख सिंह मुखे ने कहा कि सोनारी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान को लेकर बलबीर सिंह ने मुझ पर आरोप लगाये हैं. जब धन उगाही नहीं करते तो फिर संस्थाओं के गठन करने की क्या आवश्यकता है. परंतु बलबीर सिंह के द्वारा किया जा रहा अवैध कारोबार चलाने के लिए जैसे तारा होटल में अवैध बिजली-पानी का ,टाटा स्टील कंपनी के जमीन पर अवैध कब्जा अपने रेस्टोरेंट में अवैध शराब का कारोबार करना. ये सब सफेद चोला ओढ़कर कर रहें हैं. इसलिए बलबीर सिंह मुझ पर आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान पर झांक लें।
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