जानकारी के मुताबिक मैनहर्ट को काम के आवंटन करने से जुड़ी एक उपसमिति में शशिरंजन कुमार अध्यक्ष थे, वही परामर्शी समिति में भी वह बतौर सदस्य शामिल थे। एसीबी ने इस मामले में 5 नवंबर 2020 को प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी। माना जा रहा है कि इस मामले में अब पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बता दें बीते दो अक्तूबर 2020 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मैनहर्ट घोटाले की एसीबी जांच कराने का आदेश जारी किया था।
बता दें कि 2005 में रांची में सिवरेज ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण के लिए मैनहर्ट कंपनी को परामर्शी बनाया गया था। उस समय रघुवर दास राज्य के नगर विकास मंत्री थे। रघुवर दास के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहते सरयू राय ने मैनहर्ट को परामर्शी बनाए जाने पर सवाल उठाया था और कहा कि इस पूरे मामले में अनियमितता बरती गई। बीते 31 जुलाई 2020 को सरयू राय ने एसीबी में आवेदन देकर जांच की मांग की थी। जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है मामला 2006 का है और हमारी सरकार 5 वर्ष बेदाग ओर स्वच्छ रूप से चली है जिसको जो जांच करवाना है करवाले ।
वहीं सरयू राय ने कहा था कि रांची में सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम के लिए सिंगापुर की कंपनी मैनहर्ट को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया था। इस पर करीब 21 करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। उस समय से अब तक रांची में सिवरेज-ड्रेनेज का निर्माण नहीं हुआ। सरयू राय ने नगर निगम और मैनहर्ट के बीच समझौते को भी अनुचित बताया था।उन्होंने मामले में पूर्व सीएम व मैनहर्ट को परामर्शी बनाने के दौरान नगर विकास मंत्री रहे रघुवर दास समेत अन्य के खिलाफ जांच का अनुरोध किया था। सरयू राय की शिकायत पर एसीबी ने मामले में सरकार के मंत्रिमंडल, निगरानी व सचिवालय विभाग से पत्राचार किया था। सरयू राय पूरे मामले में एक किताब भी लिख चुके हैं। सरयू राय का आरोप रहा है कि मैनहर्ट की नियुक्ति में नगर विकास मंत्री रहते हुए रघुवर दास ने गड़बड़ी की। एसीबी को 18 बिंदुओं पर जांच के लिए सरयू राय ने आवेदन दिया था। आवेदन में बताया गया था कि 2005 को मैनहर्ट को परामर्शी बनाने का अनुचित आदेश दिया गया। मैनहर्ट को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया। आरोप यह भी है कि काम सिंगापुर की असली मैनहर्ट को नहीं देकर भारत में इसी नाम से बनायी संस्था को दिया गया था।
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