दोस्तों नमस्कार
कोरोना के संक्रमण के दौर में मेरा आप सबों से निवेदन है कि आप अनावश्यक भीड़ में जाने से बचें। मास्क और सैनेटाइजर का प्रयोग करें स्वस्थ रहें मस्त रहें।
पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने एवं सरकार द्वारा तय मानक शुल्क से ज्यादा पैसे वसूलने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार 111 सेव लाइफ नर्सिंग होम के संचालक डॉ ० ओ पी आनंद की गिरफ्तारी झारखंड सरकार के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है।
प्रथम दृष्टया यह मामला सिर्फ सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने और मंत्री के खिलाफ डॉक्टर द्वारा अभद्र टिपण्णी किए जाने का दिखता है, लेकिन इस घटना के पीछे कहानी कुछ और है। जो बाते डॉक्टर के माध्यम से सामने आ रही है की उसके अनुसार मंत्री के पैरवी पर लोगों का मुफ्त इलाज करने का दबाव था। वहीं डॉक्टर आनंद ने मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी,बकायदा डा ० आनंद ने पत्र लिख कर इस मामले की जांच कर कारवाई की मांग की थी। डॉक्टर की गिरफ्तारी को लेकर सरकार और कांग्रेस पार्टी में भी मतभेद है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव विजय यादव ने डॉक्टर की गिरफ्तारी को लेकर न केवल मंत्री का विरोध किया बल्कि मंत्री के आवास की घेराव की भी धमकी दी थी।इस संबंध में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा विजय यादव को शोकोज भी किया गया है। कांग्रेस के वरीय नेता ने अपना नाम न छापने के शर्त पर कहा की जिस समय डॉक्टर की गिरफ्तारी हुई है यह समय उचित नहीं है।यदि डॉक्टरों के खिलाफ इस प्रकार द्वेष की भावना से कारवाई की जाएगी तो इससे डॉक्टर समाज में गलत संदेश जाएगा और इसका असर कहीं न कहीं राज्य के स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दिखेगा। हालांकि उक्त नेता ने डॉक्टर द्वारा मंत्री के खिलाफ किए अभद्र टिपण्णी को गलत बताया।उन्होंने कहा की डॉक्टर की जुबान से इस प्रकार की अमर्यादित टिप्पणी शोभा नही देता है।
वही इस मामले में जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने भी मुख्यमंत्री की पत्र लिख कर विभिन्न बिंदुओं पर जांच करने की मांग की है। श्री राय ने कांतिलाल गांधी अस्पताल में चल रहे एडवांस डैगोनास्टिक सेंटर की जांच करने की मांग की है वही उन्होंने अपने पत्र में पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ ए के लाल में सरकारी पद पर चुनाव लडने के खिलाफ क्यों कारवाई नही हुई और उन्हें किस आधार पीआर पदोन्नति दी गई, इस बात की भी जांच की मांग मुख्यमंत्री से को है। उधर सरयू राय द्वारा कांतिलाल गांधी अस्पताल में चल रहे एडवांस डैगोनेस्टिक सेंटर की जांच की मांग के आलोक में स्वास्थ्य मंत्री पूर्वी सिंहभूम जिला के उपायुक्त को जांच करने का आदेश दिया है। धीरे धीरे यह मामला टूल पकड़ता जा रहा है। अब तो यह भी मांग उठने लगी है की कोरोना के पहले दौर में ही जमशेदपुर में मेडिका अस्पताल के बंद होने की कारणों का निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। डॉक्टर आनंद द्वारा जिस भाषा का प्रयोग मंत्री के लिए किया उसकी सर्वत्र निंदा हो रही है लेकिन जिस प्रकार कोरोना काल में जब लोगो को डॉक्टरों की आवश्यकता है ऐसे में द्वेषपूर्ण भावना से डॉक्टर की गिरफ्तारी सही नही है।आने वाले वक्त में देखना होगा की इस मामले में सरकार का क्या रुख होता है।
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