Friday, May 14, 2021

लाशों के प्रति अमानवीय व्यवहार को देख सख्त हुआ आयोग, केंद्र और राज्य को विशेष कानून बनाने का दिया निर्देश

दोस्तों आप सब से मेरा निवेदन है की कोरोना केस महामारी के दौरान आप अनावश्यक रूप से भीड़ भाड़ में जाने से बचे मास्क और शेर टाइगर का नियमित रूप से प्रयोग करें स्वस्थ रहें मस्त रहे।

देश में कोरोना वायरस से मचे कोहराम के बीच कई राज्यों में शवों को नदियों में फेंके जाने, बालू में दबाने जैसे कई मामले विभिन्न माध्यमों से प्रकाश में आए हैं। इन्हीं रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र सरकार और राज्यों को कोरोनो से मरने वालों की गरिमा बनाए रखने के लिए कानून बनाने के लिए कहा है। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि परिवहन के दौरान सामूहिक अंत्येष्टि / दाह संस्कार या शवों का ढेर नहीं होना चाहिए क्योंकि यह मृतकों की गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।
इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय सहित राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत सिफारिश भेजी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद-21 न केवल जीवित व्यक्तियों पर अपितु मृतकों के लिए भी लागू है, आयोग ने कहा, "मृतकों के अधिकारों की रक्षा करना और शव पर अपराध को रोकना सरकार की जिम्मेवारी और उनका कर्तव्य है।"
यूं तो भारत में मृतकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई विशेष कानून नहीं है, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा लिखे गए पत्र में आयोग ने बताया है कि कई अंतरराष्ट्रीय अनुबंध, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले के साथ-साथ विभिन्न सरकारों द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों में कोविड के प्रोटोकॉल को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। सिफारिश पत्र में कहा गया है कि प्रशासन बड़ी संख्या में कोरोना मौतों और श्मशान में लंबी कतारों को देखते हुए तत्काल अस्थायी श्मशान बनाएं।उसमे कहा गया है कि स्वास्थ्य के लिए उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों से बचने के लिए विद्युत शवदाहगृहों को बनाया जाना चाहिए।
आयोग ने कहा, ''परिवहन के दौरान या किसी अन्य स्थान पर शवों के ढेर की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और सामूहिक अंत्येष्टि / दाह संस्कार की अनुमति नहीं दी होनी चाहिए क्योंकि यह मृतकों की गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। श्मशान के कर्मचारियों को शवों को सही तरीके से छूने के बारे में संवेदनशील होना चाहिए। इसके अलावा, उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण और सुविधाएं देने की आवश्यकता है ताकि वे बिना किसी डर या जोखिम के अपना कर्तव्य कुशलतापूर्वक निभा सकें।''

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