Thursday, September 2, 2021

‘भूख से मौत’ में हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, सामाजिक कल्याण विभाग के सचिव को अगली तिथि पर पेश होने का आदेश


झारखंड हाइकोर्ट चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने झालसा के द्वारा दायर रिपोर्ट के आधार पर राज्य में भूख से हुई मौत के एक मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी में झारखंड सरकार की आलोचना की। पीठ ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य में शहरी क्षेत्रों से दूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन आज भी दूभर है। यहां के लोगों को जंगली की तरह ट्रीट किया जाता है। उन्हीं जंगलों में से खनिज पदार्थ निकालकर हम विकास का दंभ भरते हैं लेकिन उनका विकास नहीं होना नक्सलवाद जैसी समस्या को बढ़ावा देना है। वर्तमान समय में भी कई ऐसे गांव हैं जहां राज्य सरकार की विकास योजनाओं का फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है।
पीटने कहा कि राज्य सरकार को धरातल तक योजनाओं को पहुंचाने के लिए विचार करना चाहिए। ग्रामीण लकड़ी बेचकर अपने तथा अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। जो शर्मनाक है। खंडपीठ ने कहा कि क्या राज्य सरकार गांव में मूलभूत सुविधाएं जैसे कि स्कूल शुद्ध पीने का पानी चिकित्सा रसोई गैस उपलब्ध नहीं कराने में अक्षम है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं और कहां है।
खंडपीठ ने अगली सुनवाई की तिथि 14 दिन बाद तय करते हुए सामाजिक कल्याण विभाग के सचिव को सुनवाई के दौरान हाजिर होने का आदेश दिया है।

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