झारखंड में पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने हेतु विभिन्न जिलों में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इकाई कार्यरत है।लेकिन मजे की बात यह है की जिनके कंधों पर पर्यावरण को संरक्षित एवम् संवर्द्धन की जिम्मेवारी है उनके कंधे ही कमजोर है या यूं कहे तो पर्यावरण को प्रदूषण से हो रहे नुकसान को मॉनिटर करने के उपकरण उनके पास नही है।जिससे की बोर्ड यह पता कर सके की वायुमंडल में कितने प्रतिशत पार्टिकल्स मौजूद है जो लोगो के लिय नुकसानदेह हो सकता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी की माने तो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु बोर्ड द्वारा भगीरथ प्रयास किए जा रहे है।जिसमे छोटे बड़े कल कारखानों को वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए इक्विपमेंट लगाने के लिए कहा जाता है।बड़ी कंपनियों की मजबूरी है वो तो लगा भी लेती है लेकिन छोटी इंडस्ट्री भगवान भरोसे ही रहती है। हां समय समय पर बोर्ड द्वारा इन इंडस्ट्री के खिलाफ कारवाई कर जुर्माना भी वसूला जाता है,शायद वसूले गए जुर्माने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।वही हाल जल प्रदूषण के संबंध में भी है।जमशेदपुर की लाइफलाइन सुवर्णरेखा और खरकई नदियों में दर्जनों गंदे नाले गिरते है लेकिन उसको देखने वाला कोई नहीं।बोर्ड के पास जल प्रदुशंको मापने का यंत्र नही वह आदित्यपुर वेस्ट मैनेजमेंट संस्था के माध्यम से ही जल प्रदूषण को नियंत्रित करने की बात करते है।मतलब साफ है की जीवन आपकी है तो पर्यावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने की जिम्मेवारी भी आपकी है। तो स्वच्छ रहिए मस्त रहिए और साल में एक बार पर्यावरण दिवस मनाते रहिए।
No comments:
Post a Comment