Friday, June 4, 2021

मुख्यमंत्री करेंगे, झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ पर्षद (टीएसी) के सदस्यों का मनोनयन।


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आदिवासियों एवम् अनुसूचित जनजातियों के कल्याण एवं विकास के लिए राज्य के झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ पर्षद (टीएसी) के सदस्यों का मनोनयन का रास्ता अब साफ हो गया है। एकीकृत बिहार के वक्त का लागू नियम को राज्य सरकार ने समाप्त कर दिया है और नई नियमावली की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमावली के अनुसार मुख्यमंत्री झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ पर्षद (टीएसी) के सदस्यों का मनोनयन कर सकेंगे। पर्षद में
एक चेयरमैन, एक डिप्टी चेयरमैन, 18 सदस्यों का पर्षद, मुख्यमंत्री पदेन चेयरमैन, जनजातीय कल्याण विभाग के मंत्री डिप्टी चेयरमैन होंगे। सीएम की गैरहाजिरी में बैठकों की अध्यक्षता डिप्टी चेयरमैन करेंगे। पर्षद में जनजातीय विधायक ही बन पाएंगे सदस्य, ऐसे विधायकों की संख्या 15 होंगी। इनकी सदस्यता विधानसभा की सदस्यता तक कायम रहेगी, बाकी तीन सदस्य जनजातीय समुदाय से होंगे, जिन्हें जनजातीय मामलों में रुचि, विशेष ज्ञान और अनुसूचित जानजाति कल्याण के क्षेत्र का अनुभव होगा। मुख्यमंत्री की सहमति इनके मनोनयन के लिए आवश्यक होगा। इनका कार्यकाल मुख्यमंत्री की सहमति से बढ़ेगा। पर्षद का कार्यकाल पांच साल का होगा। अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सचिव अथवा कोई अन्य व्यक्ति जिसे सरकार की तरफ चुना जाएगा, वे पर्षद के सचिव होंगे।
परिषद का सचिवालय डॉ. राम दयाल मुंडा जनजाति शोध संस्थान, मोरहाबादी में होगा।
राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण एवं विकास के लिए राज्यपाल परिषद की सलाह ले सकेंगे। सदस्यों को सरकार की तरफ से उनके कार्यों के एवज में किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। एक साल में कम से कम दो सामान्य बैठकें होंगी। बैठक का कोरम पूरा करने के लिए अध्यक्ष सहित कम से कम सात सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

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