दोस्तों नमस्कार
कोरोना के संक्रमण के दौर में मेरा आप सबों से निवेदन है कि आप अनावश्यक भीड़ में जाने से बचें। मास्क और सैनेटाइजर का प्रयोग करें स्वस्थ रहें मस्त रहें।
2014 से सबका साथ सबका विकास नारा के साथ मोदी का विजय रथ को चला था वह बीते 7 वर्षों में अपने लक्ष्य से भटक कर सियासत की अंधी दौड़ में अंतहीन लक्ष्य की ओर सरपट भाग रहा हैl कांग्रेस से त्रस्त जनता ने नरेंद्र मोदी के आवाहन पर उनका भरपूर साथ दिया। लोगों के विश्वास के आसरे नरेंद्र मोदी सत्ता के शिखर तक पहुंचे। लेकिन इस पिछले 7 वर्षों के दौरान सबका विकास का जो वादा किया गया था वो कहीं पीछे छूट गया।हालांकि चुनावी मंच से आज भी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास नारों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन विकास की किरणें अभी तक सभी वर्गों तक सामान्य रूप से नहीं पहुंच पाई। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 7 वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक मजबूत देश के तौर पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है कई मोर्चों पर नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व की वजह से कूटनीतिक तौर पर भी भारत अपने पड़ोसी देशों पर दबाव बनाने में सफल रहा है। वही कश्मीर से 370 धारा को हटाकर मोदी सरकार ने राष्ट्रवाद के प्रति अपने संकल्प को दुहराया है। जबकि मोदी सरकार द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर हिंदुत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया।लेकिन इन सब के बीच मोदी सरकार जिन वादों के साथ 2014 में कांग्रेस को बुरी तरह पराजित कर सत्ता में आई थी, वे वादे इन 7 वर्षों में या तो जुमलों में तब्दील हो गए या फिर वे वादे चुनावी वादे ही बनकर रह गए। अच्छे दिनों की बात करे तो 7 वर्षों में महंगाई चरम पर रही है,रुपए का अवमूल्यन बदस्तूर जारी है। कलाधन कब तक वापस आएगा इसकी कोई सीमा नहीं है। आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह फेल मोदी सरकार के पास कोई विजन स्पष्ट नहीं। यह बात खुले तौर पर भाजपा के राज्यसभा सांसद ने मीडिया से बात करते हुए कहा की भाजपा के केंद्र सरकार में अर्थव्यवस्था को समझने वाला कोई नहीं है। विनिवेश के आसरे राजकोषीय घाटे को पूरी करने में लगी मोदी सरकार मुनाफे वाली कंपनियों के निजीकरण करने पर उतारू है। सरकार द्वारा सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों के निजीकरण के माध्यम से 210 लाख करोड़ रुपए जुटान
का लक्ष्य रखा गया था जिसे इस वित्तीय वर्ष में घटा कर 1.75 लाख करोड किया गया। नीति आयोग इस मामले में विचार करने के बाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी को भेजेगी।कमिटी के स्वीकृति मिलने के बाद बैंको और बीमा कांप इयोन के निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।वहीं अत्यधिक मुनाफे कमाने वाली पेट्रोलियम बीपीसीएल के निजीकरण की तैयारी में सरकार है। सवाल यह है की इस प्रकार सरकार निजीकरण के सहारे कब तक राजकोषीय घाटे को पूरा किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत कम होने के बावजूद सरकार द्वारा पेट्रोलियम कंपनियों के आड़ में पेट्रोल डीजल सहित एलपीजी गैस के कीमत में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगो पर अतरिक्त बोझ बढ़ता जा रहा है। वहीं रोजगार की बात करे तो नए रोजगार सृजन से ज्यादा लोगों की नौकरी चली गई। मुद्रास्फीति दर पिछले दस वर्षों में सबसे ऊंचे दहाई अंक में पहुंच गया। वरिष्ठ नागरिकों के जमापूंजी पर ब्याज दर कम होने से उनकी परेशानी बढ़ गई। बैंको की हालत किसी से छुपी नहीं है। कोरोना ने देश में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। शिक्षा क्षेत्र में कारपोरेट और निजी स्कूल के बढ़ते दखल से आमलोग सबसे ज्यादा त्रस्त है। निजी स्कूल प्रबंधन इस देश की सरकार और न्यायालय से उपर है। कृषि क्षेत्र की बात करे तो महज 6 प्रतिशत किसानों को ही एमएसपी मिल पा रहा है।किसानों को सरकार द्वारा तय एमएसपी भी नही मिल रहा है।उन्हे लागत से भी कम कीमतों पर अपनी फसल बेचना पड़ रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से मोदी सरकार द्वारा तीन कृषि कानून 2020, संसद से पास किया गया।जिसका किसान संगठनों द्वारा विरोध जारी है। मोदी सरकार भले चुनाव दर चुनाव अपने जीत के झंडे गाड़त रहे लेकिन स्वास्थ्य,शिक्षा रोजगार जैसे मूलभूत विषयों पर नकारा साबित हुई।हाल के दिनों में जिस प्रकार ऑक्सीजन दवा और आधारभूत संसाधन के अभाव में कोरोना संक्रमितों की मौत हुई है।इससे ना केवल राष्ट्रीय अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मोदी सरकार की छवि धूमिल हुई है। कहने को तो हर मंच से मोदी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की बात करते है और चुनाव में जीत को ही अपनी सफलता मानते है।
लेकिन मोदी सरकार इन 7 वर्षों में इस नारे को साकार करने में असफल रही है।मोदी सरकार का यह नारा सिर्फ चुनावी नारा बन कर ही रह गया है।
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