दोस्तो,
नमस्कार
आप सब तो श्री श्री 1008 फंटूश बाबा से परिचित हैं. फंटूश बाबा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं. लेकिन जिस प्रकार धर्म के प्रचार के लिए नित नए बाबाओं का अवतरण हो रहा है. उसी क्रम में श्री श्री 1008 फंटूश बाबा के दूर के रिश्तेदार श्री श्री 1008 लफंटूश बाबा का अवतरण हुआ है. नए नवेले बाबा है तो उनके शौक भी अनोखे है. एक दिन अनायास अपने दरबार में भक्तों को बीच लफंटूश बाबा ने बाबागिरी के साथ स्वंयभू पत्रकार बनने का एलान कर दिया. अब भला भक्तों की क्या औकात की वो लफंटूश बाबा को मना कर पाए तो बेचारे भक्त भविष्य के स्वंयभू पत्रकार लफंटूश बाबा की जयघोष करने लगे. लगातार भक्तों द्वारा किए जा रहे जयघोष से लफंटूश बाबा ने मान लिया की अब तो वे पत्रकार बन ही जाएंगे. बाबा ने अपने भक्तों के बीच एलान कर दिया कि जो भक्त उनके वीडियों को लाईक, शेयर और फॉलो नहीं करेगा उसका कल्याण नहीं होगा. बाबा की कृपा से वो वंचित रह जाएगा. भक्तों ने बाबा का आदेश का पालन किया और देखते ही देखते बाबा स्वंयभू टाईप के बड़े पत्रकारों में शामिल हो गए. वैसे भी आज के दौर में पत्रकार बनना बाबा बनने से कहीं ज्यादा आसान है. बाबा बनने मे जेल जाने का खतरा भी बना रहता है. और वैसे भी आजकल बाबाओ का वेल्यू थोड़ा कम हो गया है. जबकि सड़क छाप पत्रकारों को भी नेता लोग बहुत आदर सम्मान देते है. ये और बात है कि खबर नहीं छपने पर उनका(पत्रकारों) सेवा भाव भी बड़े मन से करते है. आज कल स्वंयभू पत्राकर बनना और भी आसान है. सब कुछ दूसरों का अर्थात विचार दूसरों का,फोटो और वीडियो दूसरे का केवल नाम अपना चिपका देना मात्र ही पत्रकारिता है. ना शिक्षा की आवश्यकता है ना संस्कार की. अपने को महान सिद्ध करने के लिए किसी के संबंध में कुछ भी बक देना है. कोई देखे ना देखे बस स्वंय को महान पत्रकार घोषित कर देना है. लफंटूश बाबा तो इसके माहिर खिलाड़ी है. अक्सर दूसरों के बारे में गलतबयानी कर चर्चा में बने रहने का हुनर तो लफंटूश बाबा में कूट कूट कर भरा हुआ है. अभी तक बाबा बनकर खेला कर रहे थे. अब लफंटूश बाबा स्वंयभू पत्रकार बन कर नए अवतार में खेला करेंगे. वैसे भी चुनावी मौसम के दौर में नए नए स्वंयभू पत्रकारों का अवतरण होगा. वे किसी नेता का चरित्र चित्रण तो किसी की चाटुकारिता कर अपने हुनर का बेहतर प्रदर्शन करेंगे. तब तक करिए इंतजार, नमस्कार.