सत्ता का संग्राम
जमशेदपुर लोकसभा सीट 2024
जमशेदपुर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरी बार विद्युत वरण महतो को प्रत्याशी बनाया गया है। जिसको लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। पार्टी विद्युत वरण महतो की जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त भी है । उसका मुख्य कारण जमशेदपुर लोकसभा सीट का जातिय समीकरण बताया जा रहा है जिसके कारण लगातार दो बार से लाखो वोट की अंतर से विद्युत वरण महतो जीतते रहे है। लेकिन इस बार जो ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि विद्युत वरण महतो के लिए जीत का डगर आसान नहीं है। कुड़मी जाति के प्रदेश स्तरीय नेता ने बातचीत के क्रम में कहा कि भाजपा ने कुड़मी जाति को ठगने का काम किया है जिससे कुड़मी जाति के लोगो में भाजपा के प्रति नाराजगी है। जिसके कारण इस बार पूरे झारखंड में भाजपा को कुड़मी जाति का समर्थन नहीं मिलेगा। बल्कि कुड़मी जाति के लोग भाजपा को हराने के उद्देश्य से वोट करेंगे। उन्होंने कहा कि कुड़मी जाति की जमीन सीएनटी में शामिल कर दिया लेकिन कुड़मी को जनजातीय का दर्जा नहीं मिला अगर भाजपा चाहती तो कुड़मी को जनजातीय का दर्जा दे सकती थी। लेकिन पिछले दिनों केंद्रीय जनजातीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के पास कुड़मी जाति को जनजाति में शामिल करने से संबंधित कोई विधेयक लंबित नहीं है। जबकि 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा कुड़मी जाति को जनजाति में शामिल करने के लिए विधेयक केंद्र सरकार को भेजा गया था। अब सवाल यह है कि केंद्रीय जनजातीय मंत्री ऐसा क्यों बयान दिए। जबकि उनके द्वारा ही विधेयक केंद्र सरकार को भेजा गया था। वहीं झारखंड में 14 सीट में केवल जमशेदपुर सीट से कुड़मी जाति के प्रत्याशी को भाजपा ने टिकट दिया है। वहीं ढुल्लू महतो तेली जाति से आते हैं । इसलिए 2024 के चुनाव में कुड़मी जाति भाजपा को हराने के लिए वोट का चोट करेगा। झारखंड में 24 प्रतिशत कुड़मी जाति है। अब देखना लाजमी होगा की इस बार के चुनाव में कुड़मी जाति का वोट किसके पक्ष में जायेगा। वहीं जमशेदपुर लोकसभा चुनाव की बात करे तो जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र में लगभग एक लाख कुड़मी वोट है। यही कारण है की जमशेदपुर लोकसभा सीट से आठ सांसद कुड़मी जाति से रहे है। कुड़मी जाति की नाराजगी का कितना असर इस बार के चुनाव पर पड़ेगा यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
वहीं आदिवासी समुदाय भी भाजपा से नाराज है। जिसका मुख्य कारण सरना धर्म कोड की मोदी सरकार द्वारा घोषणा नही करना बताया जा रहा है। आदिवासी समुदाय को बहुत उम्मीद थी, की 15 नवंबर 2023 को प्रधानमंत्री के झारखंड दौरे के दौरान वे बिरसा मुंडा के गांव से ही सरना धर्म कोड की घोषणा करेंगे। लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। आदिवासियों ने घोषणा किया था कि यदि प्रधानमंत्री सरना धर्म की घोषणा करेंगे तो झारखंड की लगभग 27 प्रतिशत आदिवासियों का समर्थन भाजपा को मिलेगा। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा सरना धर्म कोड की घोषणा नही करने और वन अधिकार कानून में अनावश्यक रूप से संशोधन से केंद्र सरकार के प्रति आदिवासियों की नाराजगी बढ़ी है। वहीं अगर जमशेदपुर लोकसभा की बात करे तो इस लोकसभा क्षेत्र में लगभग सात लाख आदिवासी वोटर है। आदिवासी को भाजपा कैसे मैनेज करती है अथवा आदिवासियों की नाराजगी का चुनाव पर कितना असर पड़ेगा यह बड़ा महत्वपूर्ण होगा। वहीं जमशेदपुर लोकसभा की वर्तमान स्थिति की बात करे तो 2019 के विधानसभा चुनाव में
जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा सीट में एक भी सीट पर भाजपा नहीं जीत पाई थी। पांच सीटों पर महागठबंधन के विधायक है। जबकि पूर्वी जमशेदपुर विधानसभा सीट पर निर्दलीय विधायक सरयू राय है। जमशेदपुर पश्चिम सीट से कांग्रेस विधायक बन्ना गुप्ता है जो राज्य के स्वास्थ्य मंत्री भी है। चार सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का कब्जा है जिसमें घाटशिला से रामदास सोरेन, जुगसलाई विधानसभा से मंगल कालन्दी, पोटका से संजीव सरदार और बहरागोड़ा से समीर महंती विधायक है। किसी विधानसभा पर भाजपा का कब्जा नहीं है। ऐसे में विद्युत वरण महतो के लिए जीत का डगर आसान नहीं है। लेकिन चुनाव संभावनाओं का खेल है। कुछ भी संभव है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की अभी तक इंडिया गठबंधन की ओर से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। जमशेदपुर लोकसभा सीट जेएमएम के खाते में गया है। उम्मीद है की 21 अप्रैल को रांची में होने वाले उलगुलान रैली के बाद जमशेदपुर सीट से प्रत्याशी के नाम की घोषणा की जा सकती है। प्रत्याशी के नाम की घोषणा के बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल पाएगा।